नई दिल्ली, 23/03/2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को पश्चिम एशिया तनाव के बीच ऊर्जा क्षेत्र की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में पेट्रोलियम, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की गई. बैठक का मुख्य उद्देश्य देश भर में ईंधन, बिजली और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है.
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान पैदा हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है. भारत, अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है. सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भारतीय नागरिकों को किसी भी तरह की कमी या कीमतों में अचानक उछाल का सामना नहीं करना पड़ेगा.
बैठक में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव शामिल थे. केंद्रीय मंत्रियों सर्बानंद सोनोवाल (बंदरगाह एवं जहाजरानी), मनोहर लाल खट्टर (ऊर्जा), प्रह्लाद जोशी (खाद्य एवं उपभोक्ता मामले), किंजरापु राममोहन नायडू (नागरिक उड्डयन) और हरदीप सिंह पुरी (पेट्रोलियम), राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और प्रधानमंत्री के दो प्रधान सचिव पी के मिश्रा और शक्तिकांत दास भी मौजूद थे.
पीएम मोदी ने 12 मार्च को कहा था कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने विश्वव्यापी ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है जो राष्ट्रीय चरित्र की एक गंभीर परीक्षा है और इससे शांति, धैर्य एवं लोगों में अधिक जागरूकता के जरिये निपटने की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न व्यवधानों से निपटने के लिए लगातार काम कर रही है.
मोदी ने कहा था, “यह पता लगाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि आपूर्ति शृंखला में आए व्यवधानों से हम कैसे पार पा सकते हैं.” प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया के कई नेताओं से बात की है.
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद युद्ध की शुरुआत हुई. ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और खाड़ी क्षेत्र के अपने कई पड़ोसी देशों पर हमला किया. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है जो एक प्रमुख समुद्री मार्ग है. इसके जरिये दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की ढुलाई होती है. संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने बहुत कम पोतों को इससे गुजरने की अनुमति दी है. इसके कारण भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा हो गया है.
