करनाल, 16/02/2026
हरियाणा में बड़े स्तर पर धान घोटाला हुआ है. अलग-अलग जिलों में धान के सीज़न में फर्जी गेट पास काटकर घोटाले को अंजाम दिया गया. प्रारंभिक जांच में इस धान घोटाले में अनाज मंडी के अधिकारी, हैफेड, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और वेयरहाउस कॉरपोरेशन से जुड़े हुए अधिकारियों के शामिल होने के सबूत मिले हैं. हरियाणा सरकार की ओर से 69 अधिकारियों-कर्मचारियों को सस्पेंड किया जा चुका है. अकेले करनाल में जांच के दौरान गड़बड़ी के आरोप में 5 अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं. धान घोटाले के मुद्दे पर सरकार विपक्ष और किसान संगठनों के निशाने पर है. घोटाले के विरोध में धरना-प्रदर्शन का सिलसिला जारी है.
कैसे किया गया गया धान घोटाला ?
जांच में सामने आया कि गड़बड़ी में शामिल कर्मचारी-अधिकारियों के द्वारा फर्जी गेट पास जारी कर किया गया, जबकि वहां ना तो वाहन था और ना धान. गड़बड़ी के लिए कुछ ऐसे फर्जी गेट पास काटे गए हैं जिनके कंप्यूटर सिस्टम का आईपी एड्रेस कहीं और का था. जांच में यह भी सामने आया है कि कई राइस मिलों में कागजों में धान का स्टॉक जो दिखाया गया था, वह धान भौतिक रूप से स्टॉक नहीं था. अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी स्टॉक तैयार किया गया है. ये गबन पिछले लंबे समय से चला आ रहा था.
पांच अधिकारी जा चुके हैं जेल
करनाल एएसपी कंचन सिंघल ने बताया कि “करनाल में 7 करोड़ के करीब इस धान घोटाले का अनुमान है. अब तक इस मामले में पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें इंद्री के फूड इंस्पेक्टर सप्लाई विभाग रणधीर सिंह, तरावड़ी के फूड सप्लाई विभाग के इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार, असंध के हैफेड मैनेजर प्रमोद कुमार, निसिंग के हैफेड मैनेजर दर्शन सिंह और वेयरहाउसिंग कारपोरेशन इंद्री के टेक्निकल असिस्टेंट प्रदीप शामिल हैं. जांच की प्रगति और दायरा बढ़ने पर कई और लोगों की गिरफ्तारी संभव है.
रिमांड पर लेकर एसआईटी कर चुकी है पूछताछ
करनाल एएसपी कंचन सिंघल ने बताया कि हमने धान घोटाले के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था. एसआईटी ने पूरे मामले की जांच की. जांच के दौरान अलग-अलग अनाज मंडी, राइस मिल और वेयर हाउस के रिकॉर्ड की जांच की गई. दस्तावेज और तकनीकी जांच के पांच अधिकारियों को करनाल से गिरफ्तार भी किया गया है. मामले में कई अधिकारी और कर्मचारियों को सस्पेंड किया है. गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई है. आने वाले समय में और गिरफ्तारी संभव है. संभावना है कि जांच का दायरा बढ़ने पर कई राइस मिलर भी जेल जा सकते हैं.
बड़े अधिकारियों के मिलीभगत के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं : भूपेंद्र सिंह हुड्डा
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धान घोटाले में आरोप लगाते हुए कहा है कि “इसमें सरकार सही तरीके से जांच नहीं कर रही है. छोटे-मोटे अधिकारी-कर्मचारियों को ही जांच के दायरे में लाया जा रहा है. यह घोटाला बिना बड़े सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है. इसलिए इस मामले की सही तरीके से जांच होनी चाहिए. फर्जी गेट पास काटकर ये बड़ा घोटाला किया गया है. सरकार निष्पक्ष होकर मामले की जांच करें. ”
कई राइस मिलर भी पकड़े जाऐंगे
भारतीय किसान यूनियन सर छोटू राम के प्रदेश प्रवक्ता बहादुर सिंह मैहला ने कहा कि “एसआईटी ने धन घोटाले में आरोपी पांच अधिकारियों को गिरफ्तार करके काफी अच्छा काम किया है. लेकिन अगर जांच और भी गंभीरता से की जाए तो इसमें और भी कई राइस मिल के अधिकारी-कर्मचारी लिप्त पाए जाएंगे.” उन्होंने कहा कि “धान घोटाले को लेकर उनकी यूनियन लगातार सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग कर रही थी कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए. पुलिस के द्वारा एक छोटा सा कदम पांच अधिकारियों को गिरफ्तार करके जरूर उठाया गया है लेकिन अभी इसका दायरा बहुत ही ज्यादा बड़ा है और इसमें ऐसे बहुत से नाम शामिल है जिन्होंने बड़े स्तर पर धान घोटाला किया है.”
धान घोटाले में राजनेताओं ने खाई मोटी कमाई !
धान घोटाले को लेकर विपक्ष के नेता भी सरकार पर हमला करते हुए दिखाई दे रहे हैं. थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा ने धान घोटाले के संबंध में कहा कि “छोटे-मोटे अधिकारी-कर्मचारियों को गिरफ्तार करके जांच पूरी नहीं होती. पंजाब में करोड़ों रुपए का धान घोटाला हुआ था जिसके बाद केंद्र सरकार ने जांच के आदेश दिए थे. इसी प्रकार से हरियाणा में भी केंद्र सरकार को धान घोटाले की जांच के आदेश देने चाहिए लेकिन यहां पर भाजपा सरकार है. इसलिए केंद्र सरकार उस पर जांच नहीं कर रही है. अगर धान घोटाले की सही से जांच की जाए तो जांच में सामने आएगा कि राजनेताओं ने भी धान घोटाले में मोटी कमाई खाई है. उन्होंने कहा कि “ये कोई नई बात नहीं है, हरियाणा में पिछले कई सालों से धान घोटाला किया जा रहा है.”
चढ़ूनी ने क्या कहा ?
भारतीय किसान यूनियन चढूनी ग्रुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि “धान घोटाले को लेकर उनका संगठन लगातार प्रदर्शन करता आ रहा है कि जो भी इस मामले में आरोपी है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. इसी कड़ी में अलग-अलग जिलों में अलग-अलग दिन प्रदर्शन किया जा रहा है. हमारी मांग है कि निष्पक्ष जांच की जाए.”
मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर भी फर्जी पंजीकरण
गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि “करोड़ों रुपए का धान घोटाला पूरा हरियाणा में किया गया है जो अधिकारियों और राइस मिलरों ने अंजाम दिया है. ऐसे-ऐसे स्थान का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर पंजीकरण किया गया है जो जगह खाली थी. पंजीकरण फर्जी तरीके से कर दूसरे प्रदेशों से धान खरीदी गई है, जिसका उनका संगठन भी विरोध करता रहा है.”
136000 एकड़ जमीन का पंजीकरण: चढूनी
गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि “अगर इसकी सही तरीके से जांच की जाए तो इसमें और भी बहुत से अधिकारी और राइस मिल शामिल मिलेंगे, जिन्होंने इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया है. उन्होंने कहा कि हरियाणा में 136000 एकड़ ऐसी जमीन का पंजीकरण किया गया जो किसानों ने नहीं करवाया है. वहीं 64000 एकड़ खाली पड़ी हुई जमीन का पंजीकरण किया गया है. यह घोटाले को अंजाम देने के लिए धोखाधड़ी से पंजीकरण किया गया है.”
बाढ़-बारिश के बाद रिकार्ड उत्पादन, सवालों के घेरे?
इस बार हरियाणा ने रिकॉर्ड 6208732.96 मीट्रिक टन धान खरीदा है. यह खरीद अनुमानित लक्ष्य 54 लाख मीट्रिक टन और पिछले वर्ष की खरीद 5398661.91 मीट्रिक टन से कहीं अधिक है. भारी वर्षा, बाढ़ और फसल रोगों के कारण कटाई में देरी और कम पैदावार के बावजूद लगभग आठ लाख मीट्रिक टन की ये वृद्धि हुई है. धान पैदावार में रिकॉर्ड वृद्धि को लेकर किसान संगठन और किसानों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि हरियाणा में बारिश के चलते फसलों को काफी नुकसान हुआ है. लेकिन उसके बावजूद भी आवक ज्यादा हुई है. माना जा रहा है यहां दूसरे राज्यों से धान खरीदी की गई है.
कौन से जिले में कितनी हुई खरीद
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फतेहाबाद राज्य में 1102554.38 मीट्रिक टन के साथ शीर्ष पर रहा, जो पिछले वर्ष के 743194.40 मीट्रिक टन से अधिक है. करनाल 1036419.86 मीट्रिक टन के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि पिछले सीजन में यह 840370.07 मीट्रिक टन था. कैथल में 924,984.04 मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्ष के 838,934.50 मीट्रिक टन से अधिक है. सिरसा में आवक 300767.85 मीट्रिक टन से बढ़कर 419116.91 मीट्रिक टन हो गई. यमुनानगर में आवक 609166.77 मीट्रिक टन से बढ़कर 675923.06 मीट्रिक टन हुई. हिसार में 60220.16 मीट्रिक टन की तुलना में 68200.95 मीट्रिक टन का उत्पादन दर्ज किया गया है.
राइस मिल मालिक की भी हुई गिरफ्तारी और मामले दर्ज
धान घोटाले में शुरुआती जांच करते हुए 6 मामलों में करनाल अनाज मंडी के बर्खास्त मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली को गिरफ्तार किया गया था. करनाल के असंध से भी 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें एक राइस मिलर है और 1 अन्य व्यक्ति है. करनाल में सरकारी अनाज की हेराफेरी और मंडियों में फर्जीवाड़े के दो बड़े मामलों ने प्रशासन और जांच एजेंसियों को गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया है. जिले में धान घोटाले की जांच जितनी आगे बढ़ रही है, उतने ही नए खुलासे सामने आ रहे हैं
एक ही परिसर में 4 राइस मिल
यमुनानगर जिले में प्रताप नगर क्षेत्र में चार राइस मिलें एक ही परिसर में चल रही थीं, जिनमें करोड़ों रुपये का सरकारी धान घोटाला उजागर हुआ था. यहां SIT ने सात राइस मिलों में धान की कमी पाई और कार्रवाई की थी. करनाल जिले में अब तक कई मिलर्स और अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है.
“69 अधिकारियों को किया गया सस्पेंड”
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मंत्री राजेश नागर से जब सवाल किया गया कि धान घोटाले में करनाल से पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है. इसमें उन्होंने कहा कि “हमारे सरकार के द्वारा इस मामले को लेकर गंभीरता से जांच की जा रही है. हरियाणा में जो जो अधिकारी धान घोटाले में शामिल पाए गए हैं, उनको सस्पेंड किया गया है और कुछ को गिरफ्तार किया गया है. अभी तक हरियाणा में इस मामले में 69 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है और मामले की आगे की कार्रवाई जारी है.”
