चंडीगढ़, 3/02/2026
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ द्वारा लीड एजेंसी तथा लोक निर्माण विभाग, पंजाब सरकार के सहयोग से आज चंडीगढ़ में सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण एवं सड़क अभियांत्रिकी प्रथाओं पर एक राज्य-स्तरीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में क्षेत्र में सड़क सुरक्षा परिणामों को बेहतर बनाने हेतु कार्यरत वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, अभियंताओं, योजनाकारों तथा अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण को अपनाकर सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करना था। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अवधारणा है, जिसमें सड़क डिज़ाइन एवं प्रबंधन के केंद्र में मानवीय कमजोरी एवं संभावित त्रुटियों को रखा जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अपरिहार्य मानवीय गलतियों से मृत्यु या गंभीर चोट न लगे।
यह दृष्टिकोण दुर्घटनाओं के लिए केवल सड़क उपयोगकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराने के बजाय, सुरक्षित अवसंरचना, साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों तथा बहु-विषयक समन्वय के माध्यम से एक क्षमाशील एवं लचीले सड़क परिवेश के निर्माण पर बल देता है।
इस अवसर पर पंजाब के लोक निर्माण विभाग मंत्री, श्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने राजमार्ग सुरक्षा एवं अभियांत्रिकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र और राज्य के प्रयासों के तालमेल पर ज़ोर दिया।
कार्यशाला का शुभारंभ एनएचएआई, क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी श्री राकेश कुमार के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने सड़क सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान हेतु एक समग्र, अभियांत्रिकी-आधारित रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राजमार्गों के डिज़ाइन में उभरती प्रवृत्तियों के अनुरूप मानव सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता, वैज्ञानिक योजना तथा दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विभिन्न संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कार्यशाला को भारतीय प्रशासनिक सेवा की राज्य परिवहन आयुक्त एवं महानिदेशक, सड़क सुरक्षा (लीड एजेंसी), पंजाब सुश्री प्रणीत शेरगिल; भारतीय प्रशासनिक सेवा की विशेष सचिव, लोक निर्माण विभाग, पंजाब सरकार सुश्री हरगुनजीत कौर; तथा भारतीय पुलिस सेवा के विशेष पुलिस महानिदेशक (यातायात), पंजाब श्री ए. एस. राय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी संबोधित किया। अपने संबोधनों में वक्ताओं ने मजबूत संस्थागत समन्वय, आंकड़ा-आधारित निर्णय-प्रणाली तथा अभियांत्रिकी, प्रवर्तन एवं नीतिगत उपायों के एकीकृत क्रियान्वयन के माध्यम से सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं एवं गंभीर चोटों में निरंतर कमी लाने हेतु सड़क अभियांत्रिकी पद्धतियों, यातायात प्रबंधन तथा प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ करने के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतियाँ एवं विचार-विमर्श किए गए। एनएचएआई मुख्यालय के सलाहकार (सड़क सुरक्षा) श्री सुदर्शन के. पोपली ने राजमार्गों के सुरक्षित अभियांत्रिकी डिज़ाइन से संबंधित तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी तथा यह स्पष्ट किया कि सुरक्षित सड़क अवसंरचना एवं अग्रसक्रिय सुरक्षा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
भारतीय सड़क कांग्रेस के सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एवं सदस्य श्री स्वतंत्र कुमार ने नवाचारी परावर्तक समाधानों के माध्यम से सड़क सुरक्षा पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने प्रभावी संकेतकों, उच्च दृश्यता वाली सड़क चिह्नांकन व्यवस्था तथा यातायात सुरक्षा उपकरणों (रोड फर्नीचर) की भूमिका पर प्रकाश डाला, जो वाहन चालकों की जागरूकता एवं मार्गदर्शन को बेहतर बनाते हैं।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली की प्रोफेसर गीताम तिवारी ने “रोड टू ट्रैफिक सेफ्टी 2030” विषय पर एक ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने सड़क सुरक्षा में स्थायी सुधार हेतु दीर्घकालिक रणनीतियों एवं नीतिगत हस्तक्षेपों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए योजना, प्रवर्तन एवं अवसंरचना समाधानों के सुव्यवस्थित एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।
सेव लाइफ फाउंडेशन के वरिष्ठ प्रबंधक श्री राहुल प्रकाश सिंह ने सुरक्षित राजमार्गों हेतु शून्य मृत्यु गलियारा संबंधी अभियांत्रिकी हस्तक्षेपों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने व्यावहारिक अध्ययन-उदाहरणों एवं प्रमाणित सुरक्षा उपायों को साझा किया। शून्य मृत्यु गलियारा की अवधारणा का उद्देश्य अभियांत्रिकी, प्रवर्तन, आपातकालीन देखभाल एवं सामुदायिक सहभागिता के समन्वित क्रियान्वयन के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को न्यूनतम करना है। यह एक साक्ष्य-आधारित मॉडल है, जिसने उच्च जोखिम वाले मार्गों पर मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्शाई है।
कार्यशाला में एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न राज्य सरकार विभागों के प्रतिनिधि, यातायात एवं राजमार्ग अभियंता, योजना विशेषज्ञ तथा सड़क अवसंरचना एवं सुरक्षा से जुड़े अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।
यह कार्यशाला ज्ञान-साझाकरण, तकनीकी विमर्श तथा अंतर-एजेंसी सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरी, जिसने राष्ट्रीय एवं वैश्विक सड़क सुरक्षा लक्ष्यों के अनुरूप वैज्ञानिक, टिकाऊ तथा जन-केंद्रित सड़क अभियांत्रिकी प्रथाओं के प्रति एनएचएआई की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।
इस प्रकार की पहलों के माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण देश के सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, अधिक लचीला एवं आधुनिक गतिशीलता की जटिल आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के अपने प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
