नई दिल्ली, 13/04/2026
दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर अरविंद केजरीवाल ने खुद दलीलें रखी. केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर आरएसएस से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए सुनवाई से हटने की मांग की. उधर, केजरीवाल के इन आरोपों पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने भी टिप्पणी की है. उन्होंने केजरीवाल से सवाल किए, और ये भी कहा, “मुझे उम्मीद है, मैं एक अच्छा फैसला दूंगी.”
बता दें कि कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी याचिकाओं और सीबीआई का पक्ष सुनकर फैसला सुरक्षित रखा है. फिलहाल कोई डेट नहीं दी है.
इससे पहले, अपनी दलीलों के दौरान केजरीवाल ने कहा कि जिस तरह से अब तक इस मामले में अदालती कार्यवाही हुई है, उससे उन्हें निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही है. केजरीवाल की अर्जी में 10 ऐसी दलीलें दी गई हैं, जो न केवल कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं, बल्कि जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवालिया निशान खड़ा करती हैं.
केजरीवाल ने यह भी कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर अविश्वास जताते हुए कहा कि बिना पक्ष सुने सेशन कोर्ट के आदेश को गलत बताया. उन्होंने कहा कि 9 मार्च को जब हाईकोर्ट में पहली सुनवाई हुई, तो वहां 23 में से एक भी आरोपी मौजूद नहीं था. कोर्ट में सिर्फ सीबीआई मौजूद थी, लेकिन जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने पहली ही सुनवाई में बिना दूसरे पक्ष की दलीलें सुने यह कह दिया कि ‘प्रथम दृष्टया’ सेशंस कोर्ट का आदेश गलत लगता है. बिना रिकॉर्ड मंगवाए और बिना दलीलें सुने कोर्ट इस नतीजे पर कैसे पहुंच गया.
ईडी की कार्यवाही पर भी रोक
केजरीवाल ने कहा कि बिना अर्जी के ईडी की कार्यवाही पर रोक लगाई. उन्होंने कहा कि 9 मार्च को सीबीआई की अपील पर सुनवाई हो रही थी, लेकिन जस्टिस शर्मा ने ईडी की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी. आरोपियों के मुताबिक, न तो केंद्र सरकार ने और न ही ईडी ने इसके लिए कोई प्रार्थना की थी. कानूनन, यदि मुख्य केस में अपराध साबित नहीं होता, तो ईडी का केस अपने आप कमजोर हो जाता है. सेशं कोर्ट ने सीबीआई केस खत्म कर दिया था, जिससे ईडी का मामला भी खत्म होने वाला था, लेकिन जस्टिस शर्मा ने खुद से ही इस पर रोक लगा दी.
केजरीवाल ने कहा कि इस मामले को ‘पूर्व निर्धारित षड्यंत्र’ करार देते हुए सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही का आदेश दिया था. लेकिन जस्टिस शर्मा ने इस कार्यवाही पर भी रोक लगा दी, जबकि संबंधित अधिकारी ने इसके लिए कोई आवेदन ही नहीं किया था. आरोपियों का कहना है कि यह ‘अस्वाभाविक’ सक्रियता शंका पैदा करती है.
कोर्ट की टाइमिंग पर केजरीवाल ने उठाये सवाल
केजरीवाल ने कोर्ट की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा आमतौर पर अन्य केसों में 3 से 7 महीने तक की तारीख देती हैं. लेकिन इस मामले में उन्होंने आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए महज एक हफ्ते का समय दिया. 600 पन्नों के लंबे आदेश और सीबीआई की जटिल अपील का जवाब इतने कम समय में देना लगभग नामुमकिन है.
उन्होंने अपनी अर्जी में कहा है कि जब पिछले साल पांच आरोपियों ने जमानत के लिए अर्जी लगाई थी, तब जस्टिस शर्मा ने जमानत खारिज करते हुए बहुत कठोर टिप्पणी की थी. कानूनन, बेल की स्टेज पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जाता, यह काम ट्रायल के बाद होता है, लेकिन जस्टिस शर्मा ने अपने आदेश में उन्हें पहले ही ‘दोषी’ बता दिया, जो उनकी ‘पूर्व-निर्धारित राय’ को दर्शाता है.
केजरीवाल ने अर्जी में कहा है कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा द्वारा पारित किए गए इन सभी जमानत के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बाद में रद्द कर दिया था. न केवल आदेश रद्द हुए, बल्कि आरोपियों को जमानत भी मिली और सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस शर्मा के रुख पर सख्त टिप्पणियां भी की.
अर्जी में यह गंभीर आरोप भी लगाया गया है कि जस्टिस शर्मा सीबीआई और ईडी की दलीलों को अक्षरश मान लेती हैं. यहां तक कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा मौखिक रूप से कही गई बातों पर भी तुरंत आदेश पारित कर दिए जाते हैं. आरोपियों का कहना है कि एजेंसियों की हर मांग को मान लेने से न्याय की उम्मीद धूमिल हो जाती है.
न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल
केजरीवाल ने दावा किया कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकील हैं. वे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन काम करते हैं, जो इस मामले में सरकार और एजेंसियों का पक्ष रख रहे हैं. अर्जी में कहा गया है कि ऐसे पारिवारिक संबंधों के चलते जस्टिस शर्मा से निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद करना कठिन है. अर्जी ने जस्टिस शर्मा के वैचारिक झुकाव पर भी उंगली उठाई. अर्जी में कहा गया है कि जस्टिस शर्मा आरएसएस की वकीलों वाली शाखा ‘अधिवक्ता परिषद’ की कम से कम चार मीटिंग्स में हिस्सा ले चुकी हैं. चूंकि इस केस के आरोपी आरएसएस की विचारधारा के मुखर विरोधी हैं, इसलिए उन्हें डर है कि जस्टिस शर्मा के पूर्वाग्रह उनके फैसले को प्रभावित कर सकते हैं.
अमित शाह के हालिया साक्षात्कार का जिक्र
अर्जी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक हालिया साक्षात्कार का भी जिक्र किया गया है. शाह ने कहा था कि केजरीवाल को हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा. आरोपियों का कहना है कि गृह मंत्री को हाईकोर्ट का फैसला आने से पहले ही यह कैसे पता चल गया कि फैसला केजरीवाल के खिलाफ ही आएगा? उनका आरोप है कि यह सीधे तौर पर इस बात का संकेत है कि फैसला पहले से ही तय है.
केजरीवाल के दावों पर जस्टिस स्वर्णकांता की टिप्पणी
सोमवार को इस मामले में फैसला सुरक्षित करते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने टिप्पणी की और कहा, “मैंने रिक्यूज़ल ज्यूरिस्प्रूडेंस के बारे में बहुत कुछ सीखा. मेरी ज़िंदगी में पहली बार किसी ने मुझसे रिक्यूज़ होने को कहा है. मैंने बहुत कुछ सीखा है. मुझे उम्मीद है कि मैं एक अच्छा फैसला दूंगी.”
