न्यूज डेस्क, 13/03/2026
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारतीय रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण सेल (PPAC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2025 तक भारत में वर्तमान में 33.06 करोड़ सक्रिय एलपीजी (LPG) कनेक्शन हैं, जो देश की एक विशाल आबादी की वैश्विक ऊर्जा झटकों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाते हैं.
आंकड़ों की जुबानी: राज्यों का हाल
हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत के विभिन्न राज्यों में एलपीजी पैठ अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गई है. उत्तर प्रदेश 4.85 करोड़ कनेक्शनों के साथ देश में शीर्ष पर है. इसके बाद महाराष्ट्र (3.18 करोड़), पश्चिम बंगाल (2.72 करोड़) और बिहार (2.30 करोड़) का नंबर आता है. दक्षिण भारत में तमिलनाडु (2.38 करोड़) सबसे आगे है. इन बड़े राज्यों में कनेक्शनों की भारी संख्या यह बताती है कि वैश्विक कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी करोड़ों परिवारों की बचत पर सीधा असर डालती है.
आयात पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है. वैश्विक स्तर पर होने वाली भू-राजनीतिक उथल-पुथल, जैसे पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में बाधा, सीधे तौर पर घरेलू सिलेंडर की कीमतों को प्रभावित कर रही है. मार्च 2026 के ताजा घटनाक्रमों ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण घरेलू सिलेंडरों के दामों में वृद्धि देखी गई है.
उज्ज्वला योजना और आर्थिक दबाव
सरकार की ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के तहत 10.33 करोड़ से अधिक परिवारों को मुफ्त कनेक्शन दिए गए हैं. ये वे परिवार हैं जो आर्थिक रूप से सबसे कमजोर वर्ग में आते हैं. वैश्विक कीमतों में उछाल की वजह से जब सब्सिडी का बोझ बढ़ता है या सिलेंडर महंगे होते हैं, तो इन परिवारों के लिए ‘रिफिल’ करवाना मुश्किल हो जाता है. आंकड़ों के अनुसार, एक औसत भारतीय परिवार अब अपने मासिक बजट का 7.5% से 10% हिस्सा केवल ईंधन और ऊर्जा पर खर्च कर रहा है.
सरकार के बचाव के उपाय
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए, भारत सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने का आदेश दिया है, जिससे घरेलू उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. सरकार ने निर्देश दिया है कि पूरा उत्पादन घरेलू उपभोक्ताओं की ओर मोड़ा जाए ताकि रसोई में ईंधन की कोई कमी न हो. सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और लोग घबराकर खरीदारी न करें.
