न्यूज डेस्क, 24/02/2026
वैश्विक अनिश्चितताओं और चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में भारत की जीडीपी (GDP) विकास दर 8 से 8.1 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है.
घरेलू मांग और खपत में तेजी
SBI के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने रिपोर्ट में कहा कि उच्च-आवृत्ति वाले डेटा से संकेत मिलते हैं कि आर्थिक गतिविधियां बेहद लचीली रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में खपत काफी मजबूत है, जो खेती और गैर-कृषि गतिविधियों से मिलने वाले सकारात्मक संकेतों का परिणाम है. वहीं, पिछले त्योहारी सीजन के बाद से शहरी मांग में भी लगातार सुधार देखा जा रहा है, जिसे सरकारी राजकोषीय प्रोत्साहन से अतिरिक्त समर्थन मिला है.
आधार वर्ष (Base Year) में ऐतिहासिक बदलाव
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक और महत्वपूर्ण मोड़ इसका सांख्यिकीय आधार वर्ष बदलना है. भारत अपने जीडीपी आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने जा रहा है. इसकी नई सीरीज 27 फरवरी को जारी की जाएगी. इस बदलाव का उद्देश्य डिजिटल कॉमर्स, सर्विस सेक्टर और अनौपचारिक क्षेत्र के बदलते ढांचे को सही ढंग से मापना है. इसके अलावा, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार वर्ष को भी बदलकर 2024 किया जा रहा है.
नए डेटा स्रोतों का उपयोग
जीडीपी गणना की नई पद्धति में जीएसटी (GST) रिकॉर्ड, ई-वाहन पंजीकरण और प्राकृतिक गैस की खपत जैसे डेटा स्रोतों का उपयोग किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों और डेटा की सटीकता के चलते भारत जल्द ही दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बड़े नीतिगत बदलावों के कारण संशोधन की सीमा का सटीक अनुमान लगाना फिलहाल चुनौतीपूर्ण है.
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की संभावित जीडीपी विकास दर 7 प्रतिशत के आसपास है और वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान इसके 6.8 से 7.2 प्रतिशत के दायरे में रहने की उम्मीद है. वैश्विक स्तर पर विकास दर 2025 और 2026 में 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ते कर्ज के कारण यह विकास असमान रह सकता है. ऐसे समय में भारत का 8% की दर से आगे बढ़ना उसकी आर्थिक सुदृढ़ता का प्रमाण है.
