चंडीगढ़, 20 जुलाई, 2024
पंजाब के राज्यपाल और यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक ने आज पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के लॉ ऑडिटोरियम में स्वर्गीय पद्मश्री सुरजीत पातर के जीवन और साहित्यिक योगदान को सम्मानित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया। अपने मार्मिक संबोधन में राज्यपाल ने सुरजीत पातर की कविता की पंक्तियों को उद्धृत करके अपना भाषण शुरू किया।
“कुझ केहा तान हनेरा जरेगा किवें,
चुप रहा ता शमादांन की कैहनगे”
दिवंगत कवि के विचारों और चरित्र का सार प्रस्तुत करते हुए राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि ये पंक्तियाँ सुरजीत पातर के स्वभाव, सोच और चरित्र का वर्णन करने के लिए पर्याप्त हैं। राज्यपाल पुरोहित ने श्री सुरजीत पातर जी के साहित्य में अमूल्य योगदान और पंजाबी संस्कृति के प्रति उनके अद्वितीय प्रेम की सराहना की। श्री मनराज पातर, पुत्र और उनके छोटे भाई श्री उपकार सिंह पातर ने ,पातर साहिब की रचनाओं को खूबसूरती से प्रस्तुत किया, उनकी भावना को जगाया और दर्शकों के दिलों को छू लिया।
लॉ ऑडिटोरियम को मिनी पंजाब में बदल दिया गया, जिसमें 500 से अधिक लेखक, कवि, बुद्धिजीवी, शिक्षक और पातर साहिब के प्रशंसक अपने प्यार और सम्मान को व्यक्त करने के लिए एकत्र हुए। इस कार्यक्रम में सप्तसिंधु टीम द्वारा एक स्मारक पोस्टर का विमोचन भी हुआ, साथ ही पातर साहिब की पुस्तकों और पोस्टरों का एक सेट भी आने वाले लेखकों और विशेष मेहमानों को वितरित किया गया।
इस कार्यक्रम के दौरान प्रो. रेणु विग, कुलपति पंजाब विश्वविद्यालय, डॉ. वरिंदर गर्ग, सप्त सिंधु निवेदिता ट्रस्ट की संस्थापक, श्रीमती भूपेंद्र कौर (सुरजीत पातर की पत्नी), पंजाब कला परिषद के अध्यक्ष डॉ. सवरनजीत सिंह सावी और अन्य प्रतिष्ठित कवि भी उपस्थित रहे।