न्यूज डेस्क, 11/01/2026
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व किया. इसका आयोजन गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वालों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के लिए किया गया. उन्होंने ऐतिहासिक मंदिर में पूजा-अर्चना भी की और सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी जिनकी प्रतिमा मंदिर परिसर के पास स्थापित है. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित इस यात्रा में 108 अश्वों की झांकी निकाली गई जो वीरता और बलिदान का प्रतीक है.
प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए शंख सर्कल से वीर हमीरजी गोहिल सर्कल तक यात्रा मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग और श्रद्धालु एकत्र हुए थे. प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहन पर खड़े होकर एक किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान जनता का हाथ हिलाकर अभिवादन किया. युवा पुजारियों का एक समूह, जिन्हें ‘ऋषि कुमार’ भी कहा जाता है, मोदी के वाहन के साथ-साथ चलते हुए भगवान शिव का वाद्ययंत्र ‘डमरू’ बजा रहा था. एक समय ऐसा भी आया जब मोदी ने स्वयं एक पुजारी से दो डमरू लिए और अपने वाहन पर खड़े होकर उन्हें बजाया.
जम्मू कश्मीर सहित देश भर से आए कलाकारों ने मार्ग में नियमित दूरी पर बने मंचों पर अपने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए. यात्रा ‘वीर हमीरजी गोहिल सर्कल’ पर समाप्त हुई, जहां से प्रसिद्ध मंदिर का मार्ग शुरू होता है. मोदी ने चौक पर स्थित हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1299 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत की सेना के आक्रमण के खिलाफ सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था.
बाद में, मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की, जिनकी प्रतिमा मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास स्थापित है. पटेल के प्रयासों के फलस्वरूप ही स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और इसे औपचारिक रूप से 1951 में श्रद्धालुओं के लिए खोला गया. प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना भी की. उन्होंने मुख्य पुजारी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर में पूजा कार्यक्रम में भाग लिया.
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ भारत के उन अनगिनत नागरिकों को याद करने के लिए मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया, जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करता रहेगा. महमूद गजनी ने करीब एक हजार साल पहले 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था और इस दौरान अपना जीवन कुर्बान करने वालों की याद में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है. पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के एक बयान के अनुसार, सदियों पहले इस मंदिर को नष्ट करने के कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज विश्वास, साहस और राष्ट्रीय गर्व के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में खड़ा है. यह सब इसे इसकी प्राचीन महिमा में बहाल करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों के कारण संभव हुआ है.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि आजादी के बाद गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें अब भी सक्रिय हैं और भारत को उन्हें हराने के लिए सतर्क, एकजुट तथा शक्तिशाली बने रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है। उन्होंने कहा कि यह समय का चक्र है जिसके तहत आततायी अब इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी शान से खड़ा है.
मोदी यहां आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित कर रहे थे, जो 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया है. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘नफरत, अत्याचार और आतंक का सच्चा इतिहास हमसे छिपाया गया और हमें सिखाया गया कि यह हमला मंदिर को लूटने का प्रयास था.’’ मोदी ने कहा कि यदि सोमनाथ पर हमला धन-संपत्ति लूटने के लिए किया गया होता, तो पहला हमला ही काफी था लेकिन इस पर बार-बार हमले किए गए और इसके देवता का अपमान किया गया.
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तो उनके रास्ते में बाधाएं खड़ी की गईं. मोदी ने कहा, ‘‘तुष्टीकरण में लिप्त लोगों ने चरमपंथी मानसिकता वाले लोगों के सामने घुटने टेक दिए। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में बाधा डालने वाली ताकतें आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। ऐसी ताकतों को हराने के लिए हमें सतर्क, एकजुट और शक्तिशाली बने रहने की जरूरत है.’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सोमनाथ की कहानी भारत की कहानी है. विदेशी आततायियों ने इस मंदिर की तरह कई बार भारत को नष्ट करने की कोशिश की। आततायियों ने सोचा कि मंदिर को नष्ट करके उन्होंने जीत हासिल कर ली है लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ का झंडा शान से लहरा रहा है.’’ उन्होंने कहा कि विश्व के इतिहास में इन 1,000 वर्षों के संघर्ष की कोई बराबरी नहीं है.
दुर्भाग्य से आज भी मंदिर के रीडेवलपमेंट का किया जा रहा विरोध’, बोले पीएम मोदी
“आजादी के बाद, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के रेनोवेशन का वादा किया, तो उन्हें ऐसा करने से रोका गया. 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के सोमनाथ दौरे पर भी आपत्तियां उठाई गईं. दुर्भाग्य से, आज भी, सोमनाथ मंदिर के रीडेवलपमेंट का विरोध करने वाली ताकतें मौजूद और एक्टिव हैं. तलवारों की जगह भारत के खिलाफ छिपी हुई साजिशों ने ले ली है. हमें उनके बारे में ज्यादा जागरूक रहने की ज़रूरत है. हमें खुद को मज़बूत करना होगा और एकजुट रहना होगा. हमें हर उस ताकत को हराना होगा जो हमें बांटने की कोशिश करती है. पिछले 1000 सालों का सफर हमें अगले 1000 सालों के लिए तैयार रहने की प्रेरणा देगा.”, बोले पीएम मोदी
‘सोमनाथ मंदिर की लूट सिर्फ खजाने की लूट नहीं थी’, बोले पीएम मोदी
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “दुर्भाग्य से, आजादी के बाद, औपनिवेशिक सोच वाले लोगों ने हमारे शानदार अतीत से छुटकारा पाने की कोशिश की. उन्होंने इतिहास को मिटाने की पूरी कोशिश की. सोमनाथ मंदिर के लिए लड़ने वालों को उनका सही सम्मान और महत्व नहीं दिया गया. कुछ इतिहासकारों और राजनेताओं ने तो इन हमलावरों के इतिहास पर पर्दा डालने की भी कोशिश की. धार्मिक हमले को लूट का नाम दिया गया. हमें हमारी किताबों में पढ़ाया गया है कि सोमनाथ मंदिर को उसके खजाने को लूटने के लिए तोड़ा गया था. नफरत, अत्याचार और आतंक का क्रूर इतिहास हमसे छिपाया गया.”
सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, “सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का इतिहास नहीं है, यह विजय और पुनर्निमाण का है. हमारे पूर्वजों के पराक्रम का है, हमारे पूर्वजों के त्याग और बलिदान का है. आक्रांता आते रहे लेकिन हर युग में सोमनाथ पुन: स्थापित होता रहा, इतनी सदियों का संघर्ष, इतना महान धैर्य, सृजन और पुनर्निमाण का यह जीवट, दुनिया के इतिहास में ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है.”
उन्होंने कहा, “1000 साल पहले, हमलावरों को लग रहा था कि उन्होंने यह जमीन जीत ली है, लेकिन आज, 1000 साल बाद भी, सोमनाथ मंदिर के ऊपर लगा ‘ध्वज’ पूरी दुनिया को भारत की ताकत और काबिलियत के बारे में बता रहा है.”
सबको मेरी तरफ से जय सोमनाथ, बोले पीएम मोदी
संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग हमारे साथ जुड़े हैं, उन सबको मेरी तरफ से जय सोमनाथ. ये समय अद्भुत है, ये वातावरण अद्भुत है, ये उत्सव अद्भुत है. एक ओर देवाधिदेव महादेव, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की ये गूंज, आस्था का ये उफान और इस दिव्य वातावरण में भगवान सोमनाथ के भक्तों की उपस्थिति… इस अवसर को भव्य और दिव्य बना रही है.” उन्होंने कहा, “यह समय, यह माहौल और यह अवसर दिव्य है… मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी के तौर पर इस अवसर की सेवा करने का मौका मिला.”
मंदिर परिसर से पीएम मोदी का संबोधन
पीएम मोदी ने कहा, सोमनाथ मंदिर की समय के साथ यात्रा, जो भारत के लचीलेपन, आस्था और सभ्यतागत आत्म-सम्मान का प्रतीक है. सदियों से, सोमनाथ पर हमलावरों ने बार-बार हमला किया. लेकिन हर बार, भक्तों के सामूहिक संकल्प से मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया. पुनरुद्धार के इस अटूट चक्र ने सोमनाथ को भारत की सभ्यतागत निरंतरता का एक शक्तिशाली प्रतीक बना दिया है. साल 2026 उस समय के भी 75 साल पूरे होने का प्रतीक है, जब आज के सोमनाथ मंदिर को आज़ादी के बाद 11 मई 1951 को भक्तों के लिए फिर से खोला गया था. ये दोनों मील के पत्थर मिलकर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की नींव बनाते हैं.
सोमनाथ मंदिर से पीएम मोदी का संबोधन, बोले, ‘जब हमारे पूर्वजों ने लगा दी थी जान की बाजी’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, यह हमारे लिए गर्व का क्षण है, यह पूरे देश के लिए गर्व का समय है. यह दिव्य और भव्य अवसर है. हम सबको महादेव का साक्षात आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है. आज से ठीक एक हजार साल पहले, जहां हमलोग बैठे हैं, उस समय के बारे में आप सोचिए, क्या माहौल रहा होगा, जब हमारे पुरखों ने जान की बाजी लगा दी थी, अपनी आस्था, विश्वास और महादेव के लिए उन्होंने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था. उन्होंने कहा, “आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो बार-बार मन में प्रश्न आ रहा है कि ठीक 1000 वर्ष पहले, ठीक इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा? अपनी आस्था, अपने विश्वास, अपने महादेव के लिए हमारे पुरखों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. 1000 साल पहले वह आक्रंता सोच रहे थे कि हमें जीत लिया कि आज 1000 साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है. यहां का कण-कण वीरता और साहस का साक्षी है.”
शौर्य यात्रा के बाद सोमनाथ मंदिर पहुंचे पीएम मोदी
‘शौर्य यात्रा’ खत्म होने के बाद, पीएम नरेंद्र मोदी सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया. यह गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक औपचारिक शोभा यात्रा है. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित इस यात्रा में 108 अश्वों की झांकी निकाली गई जो वीरता और बलिदान का प्रतीक है.
प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए यात्रा मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग और श्रद्धालु जमा हुए थे. प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहन पर खड़े होकर एक किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान जनता का हाथ हिलाकर अभिवादन किया.
‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ भारत के उन अनगिनत नागरिकों को याद करने के लिए मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया, जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करता रहेगा. महमूद गजनी ने करीब एक हजार साल पहले 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था और इस दौरान अपना जीवन कुर्बान करने वालों की याद में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है.
शौर्य यात्रा में पीएम मोदी समेत कई लोगों ने की भागीदारी
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के हिस्से के तौर पर आयोजित ‘शौर्य यात्रा’ में लोगों ने बढ़ चढ़कर लिया भाग. पीएम मोदी इस यात्रा में हुए शामिल. गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भी मौजूद थे. शौर्य यात्रा साहस, बलिदान और उस अदम्य भावना का प्रतीक है जिसने सदियों की मुश्किलों के बावजूद सोमनाथ को बचाए रखा.
पीएम ने वीर हमीरजी गोहिल की मूर्ति पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ में आयोजित शौर्य यात्रा में शामिल हुए. शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों के साथ एक प्रतीकात्मक जुलूस निकला. यह शौर्य, साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद पीएम ने वीर हमीरजी गोहिल की मूर्ति पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने 1299 ई. में जफर खान के हमले से सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी.
यहां आकर धन्य महसूस कर रहा हूं, बोले पीएम मोदी
मोदी ने शनिवार शाम को सोमनाथ मंदिर में ‘ओंकार मंत्र’ के उच्चारण में भाग लिया, दर्शन किए और 3,000 ड्रोन के एक भव्य ड्रोन शो का भी अवलोकन किया. प्रीति करेलिया (24) अन्य महिलाओं के साथ, केवल समारोहों को देखने के लिए पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के मुंबई से यहां आईं. करेलिया ने कहा, “हम आज सोमनाथ मंदिर देखने और अपने प्रधानमंत्री से मिलने आए हैं। मंदिर और इसकी परंपराओं और दृढ़ता का जश्न मनाने वाला यह अवसर एक अद्भुत अनुभूति है. आतिशबाजी, मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों की सजावट और शानदार ड्रोन शो ने उस दिव्य शक्ति को और बढ़ा दिया है जिसके कारण इतने सारे लोग मात्र एक दिन में इस मंदिर में आए हैं.
महिलाओं के इस समूह ने खुद को मुंबई की ‘भजन मंडली’ बताया. शंख सर्कल से वीर हमीरजी गोहिल सर्कल तक मंदिर की ओर जाने वाली मुख्य सड़क को फूलों से सजाया गया है त्रिशूल, ओम और डमरू के आकार में बनी लाइट से पूरा इलाका सजा हुआ था, साथ ही सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के पोस्टर और फूलों से बने शिवलिंग भी लगे हुए थे. शहर भर में बड़े-बड़े बैनर लगे हैं जिनपर ‘अखंड सोमनाथ, अखंड भारत’ जैसे नारे लिखे हैं और ‘प्रहार से पुनरुत्थान का साक्षी, मैं स्वयंभू सोमनाथ हूं’ जैसी पंक्तियां लिखी हुई हैं.
प्रधानमंत्री के आगमन के साथ ही मंदिर परिसर के मुख्य द्वारों के पास लोगों का भारी जनसमूह उमड़ पड़ा, जबकि सुरक्षाकर्मी व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहे. शनिवार रात को आने वाले श्रद्धालुओं में भावनगर से आए भारद्वाज गिरि जैसी धार्मिक शख्सियत और पड़ोसी जिले जूनागढ़ से आए वरिष्ठ नेता गिरीश एम. कोटेचा शामिल थे. वीर हमीरजी गोहिल सर्कल के पास ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत करते हुए गिरि ने कहा कि वीर हमीरजी जैसे लोगों ने “हमारे हिंदू तीर्थस्थलों के गौरव की रक्षा” के लिए लड़ाई लड़ी। वीर हमीरजी 16वीं शताब्दी के राजपूत योद्धा थे जिन्हें आक्रमणकारियों के खिलाफ सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए याद किया जाता है. कोटेचा ने बताया, “यह सोमनाथ की भावना का उत्सव है और इस अवसर पर लोगों के बीच खुशी देखी जा सकती है.”
दर्शन के बाद कई लोग लौट गए, लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों और ड्रोन शो के कारण श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी रहा. खासकर बड़ी संख्या में महिलाएं जनवरी की ठंड की परवाह किए बिना पूरे उत्साह के साथ मंदिर परिसर में पहुंचती रहीं. करीब 15 मिनट तक चले ड्रोन शो में भगवान शिव और शिवलिंग की विशाल आकृतियों सहित कई विषयगत संरचनाएं दिखाई गईं, वहीं सोमनाथ मंदिर का 3डी रूपांकन भी प्रस्तुत किया गया. इसके बाद हुई भव्य आतिशबाजी ने पूरे कार्यक्रम को और यादगार बना दिया.
