नई दिल्ली, 22/02/2026
कांग्रेस (AICC) के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने रविवार को कहा कि प्रियंका गांधी वाड्रा के दौरे के बाद चुनावी राज्य असम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है और अब वे सत्ताधारी एनडीए के खिलाफ पार्टी का प्रचार अभियान तेज करेंगे.
असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की हेड प्रियंका गांधी ने 19 और 20 फरवरी को राज्य का दौरा किया और पार्टी के ब्लॉक प्रमुख, जिला अध्यक्ष, विधायकों, सांसदों और राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्यों से आमने-सामने बातचीत की ताकि चुनावी राज्य के जमीनी हालात का पता चल सके.
असम में कुल 126 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव अप्रैल में होंगे. कांग्रेस 2016 से सत्ता से बाहर है और सत्ता में वापसी के लिए कड़ी मेहनत कर रही है. पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाले NDA का मुकाबला करने के लिए विपक्षी गठबंधन बनाया है.
असम के दो दिवसीय दौरे से लौटने के बाद, प्रियंका गांधी ने शनिवार को दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ पूर्वोत्तर राज्य के लिए चुनावी रणनीतिक की समीक्षा की. इससे पता चलता है कि अब वह पूरे चुनावी मुकाबले की प्रभारी होंगी और सिर्फ उम्मीदवार चुनने तक ही सीमित नहीं रहेंगी.
बातचीत के बाद, प्रियंका ने राज्य के नेताओं से कहा है कि वे स्थानीय कार्यकर्ताओं से मिले सुझावों को प्राथमिकता दें, जो असल में जमीन पर NDA से लड़ेंगे.
इसलिए, प्रदेश इकाई अब राज्य सरकार में भ्रष्टाचार पर फोकस करते हुए पार्टी के चल रहे अभियान को और तेज करेगी और बेरोजगारी के मुद्दे को उठाएगी. कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि वे बीजेपी के कथित विभाजनकारी एजेंडे का मुकाबला करने की भी कोशिश करेंगे.
असम के प्रभारी कांग्रेस सचिव पृथ्वीराज साठे ने ईटीवी भारत को बताया, “इस दौरे का मुख्य उद्देश्य पार्टी संगठन की स्थिति की समीक्षा करना और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेना था. 19 फरवरी की सुबह पार्टी ऑफिस पहुंचने के तुरंत बाद वह (प्रियंका गांधी) स्थानीय नेताओं से मिलीं और रात 3 बजे तक कई पदाधिकारियों से आमने-सामने बातचीत की. अपने इस दौरे में वह जिला प्रमुखों, ब्लॉक प्रमुखों, पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के सदस्यों, विधायकों और सांसदों से मिलीं और कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया. उनसे बातचीत के बाद स्थानीय नेता उत्साह में हैं और अब NDA के खिलाफ चल रहे अभियान को और तेज करेंगे.”
कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि प्रियंका गांधी की कार्यकर्ताओं को दी गई हिम्मत बढ़ाने वाली बातों से उनमें उत्साह पैदा हुआ, और बदले में उन्हें कीमती फीडबैक भी मिला, जिसका इस्तेमाल अब पार्टी की चुनावी रणनीति को बेहतर बनाने में किया जाएगा.
कांग्रेस के सामने मुख्य कार्यों में से एक असम में कुछ समान विचारधारा वाले दलों के साथ चल रही सीट बंटवारे की बातचीत को जल्द से जल्द समाप्त करना है. देश की सबसे पुरानी पार्टी ने वाम दलों, रायजोर दल, असम जातीय परिषद, जेडीए और एपीएचएलसी के साथ गठबंधन बनाया है. कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया इन दलों के साथ बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं.
असम के लिए प्रभारी कांग्रेस सचिव मनोज चौहान ने ईटीवी भारत को बताया, “सीट बंटवारे पर बातचीत हो रही है. क्षेत्रीय पार्टियों की हमेशा अपनी मांगें होती हैं, लेकिन बातचीत लेन-देन की भावना से हो रही है क्योंकि मुख्य लक्ष्य एनडीए को हराना है.” इस कड़े मुकाबले के लिए कांग्रेस के लिए दूसरा काम सबसे सही उम्मीदवारों को शॉर्ट-लिस्ट करना है.
चौहान ने कहा, “स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य पूरे राज्य में घूमे हैं. उम्मीदवारों को शॉर्ट-लिस्ट करते समय उनके फीडबैक और कार्यकर्ताओं की राय को ध्यान में रखा जाएगा. ऐसा करने में पार्टी की विचारधारा के प्रति वफादारी और जीतने की क्षमता पर मुख्य ध्यान दिया जाएगा.”
कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि लॉयल्टी फैक्टर (निष्ठा कारक) इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि प्रियंका के दौरे से कुछ दिन पहले ही असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी छोड़ दी थी. बोरा रविवार को औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गए. कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने अपने फैसले ले लिए हैं और अब पार्टी के लिए आगे बढ़ने का समय आ गया है.
साठे ने कहा, “वह बीजेपी में शामिल हो गए हैं. चुनावी मौसम में नेता आते-जाते रहते हैं. अब समय आ गया है कि हम आगे बढ़ें और आने वाले चुनावों पर ध्यान दें.”
पार्टी सूत्रों ने बताया कि उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग तेज होने के साथ ही प्रियंका गांधी का चुनावी राज्य का अगला दौरा जल्द ही होगा.
कांग्रेस के लिए असम में जीत हासिल करना एक कठिन कार्य है, क्योंकि पार्टी 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की 60 सीटों के मुकाबले सिर्फ 29 सीटें जीत पाई थी. कांग्रेस की इस बार लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना है.
हालांकि, कांग्रेस राज्य में भाजपा सरकार के दो कार्यकाल के बाद सत्ता विरोधी लहर के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की विरासत पर भरोसा कर रही है, जिनके बेटे गौरव गोगोई को पिछले साल असम कांग्रेस का प्रमुख बनाया गया था.
हालांकि गोगोई को पार्टी के चेहरे के रूप में दिखाया जा रहा है क्योंकि प्रियंका ने अपने दौरे के दौरान उनका समर्थन किया था, लेकिन लोकसभा सांसद खुद किसी भी अनचाही पब्लिसिटी से बचने के लिए सामूहिक नेतृत्व की धारणा पर जोर दे रहे थे.
