नई दिल्ली, 12/02/2026
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से अब तक अपनाए गए ‘प्रोसिजरल प्रोटोकॉल’ पर एक छोटी रिपोर्ट फाइल करने को कहा. कोर्ट को बताया गया कि 12 जून, 2025 को एयर इंडिया प्लेन क्रैश की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन बोर्ड (AAIB) द्वारा की जा रही जांच अब अपने आखिरी पड़ाव पर है.
एयर इंडिया की बोइंग 787-8 फ्लाइट एआई-171, जो लंदन के गैटविक एयरपोर्ट जा रही थी, उसे पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमीत सभरवाल और को-पायलट कैप्टन क्लाइव कुंदर ऑपरेट कर रहे थे. प्लेन के गुजरात के अहमदाबाद से उड़ान भरने के बाद यह क्रैश हुआ. इसमें 241 पैसेंजर और क्रू मेंबर समेत 260 लोग मारे गए. गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी मरने वालों में शामिल थे.
यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया. एनजीओ सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा, ‘जो हुआ वह बहुत चिंता की बात है कि इस हादसे के बाद उसी बोइंग 787 के तीन और एयर इंडिया एयरक्राफ्ट में भी ऐसी ही दिक्कतें (फ्यूल स्विच के बारे में) आई हैं.’
सीजेआई ने कहा, ‘मीडिया रिपोर्ट पर मत जाइए…पिछले हफ्ते या उसके आस-पास वे कह रहे थे कि बोइंग, यह ड्रीमलाइनर 787, लंदन से बेंगलुरु आ रहा था, वहाँ यह स्विच मिला…मैं करीब से फ़ॉलो कर रहा था क्योंकि रविवार को मैं पेरिस से दिल्ली के लिए एक ड्रीमलाइनर में था. कुछ नहीं मिला, एयरलाइन ने एक ऑफिशियल बयान दिया कि स्विच पूरी तरह से ठीक था.’
सीजेआई ने कहा, ‘यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था. 261 बेगुनाह लोगों की जान चली गई. यह किसी भी देश के लिए कोई छोटी-मोटी त्रासदी नहीं है. एक माता-पिता के लिए जो अपने पायलट बेटे को इस तरह खो रहा है, हम समझ सकते हैं. हमें पिता के साथ पूरी सहानुभूति है और हम सच में नहीं जानते कि वह इस सदमे और खालीपन से कैसे बाहर निकल पाएंगे.’
सीजेआई ने कहा, ‘लेकिन हमें किसी खास ब्रांड के एयरक्राफ्ट के खिलाफ टिप्पणी करते समय बहुत सावधान रहना चाहिए. एक समय था जब ड्रीमलाइनर को सबसे अच्छे और सबसे सुरक्षित एयरक्राफ्ट में से एक माना जाता था.’
केंद्र और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि AAIB की जांच आखिरी स्टेज में है और कुछ हिस्से दूसरे देशों में करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़ी तीन याचिकाओं को पूरी सुनवाई के लिए तीन हफ्ते बाद लिस्ट किया जा सकता है.
बेंच का शुरू में मानना था कि एएआईबी की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में उसके सामने पेश की जाए. मेहता ने बेंच को भरोसा दिलाया कि जांच की डिटेल्स उनके साथ शेयर की जाएगी. बेंच ने कहा कि एएआईबी का काम क्रैश का कारण पता लगाना है, न कि मकसद बताना.
भूषण ने कहा कि 8,000 से ज्यादा पायलट कह रहे हैं कि बोइंग 787 सुरक्षित नहीं है और इसे उड़ान से रोक देना चाहिए. उन्होंने बताया कि एएआईबी जांच टीम में पांच सदस्य डीजीसीए से हैं. मेहता ने कहा, ‘भूषण को संतुष्ट करने का एकमात्र तरीका खुद भूषण की अध्यक्षता में एक कमेटी नियुक्त करना है.’ बेंच ने केंद्र से जांच में अब तक अपनाए गए प्रोसीजरल प्रोटोकॉल पर एक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा.
सीजेआई ने कहा, ‘एएआईबी जांच का नतीजा देखते हैं और फिर हम देखेंगे कि कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की जरूरत होगी या नहीं और तीनों याचिकाओं पर सुनवाई तीन हफ्ते बाद तय की. सुप्रीम कोर्ट 28 जनवरी को उन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए मान गया था, जिनमें आरोप लगाया गया था कि 12 जून, 2025 को हुए एयर इंडिया प्लेन क्रैश की ऑफिशियल जांच ने नागरिकों के जीवन, बराबरी और सच्ची जानकारी तक पहुंच के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन किया है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि क्रैश की एएआईबी की शुरुआती रिपोर्ट में मृतक पायलट कैप्टन सभरवाल को दोषी नहीं ठहराया गया था.
