नई दिल्ली, 05/02/2026
संसद के उच्च सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के दौरान विपक्ष के वॉकआउट ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. सदन से बाहर आने के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद फौजिया खान ने सरकार पर तानाशाही और विपक्ष की आवाज दबाने के गंभीर आरोप लगाए हैं.
माइक बंद करने का आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने वॉकआउट के बाद ईटीवी भारत से बात करते हुए सरकार के रवैये की कड़ी निंदा की. उन्होंने सदन के भीतर होने वाले भेदभाव की ओर इशारा करते हुए कहा:
जब सत्ता पक्ष के नेता जैसे निशिकांत दुबे और अन्य सदस्य कोई किताब लेकर कुछ भी बोलते हैं, तो उनका माइक बंद नहीं किया जाता. लेकिन जब लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब का रेफरेंस देते हैं, तो उनका माइक तुरंत बंद कर दिया जाता है. ऐसे में हम प्रधानमंत्री की बातों को क्यों सुनें?”
असहज और असहिष्णु है सरकार’: फौजिया खान
कांग्रेस के साथ वॉकआउट करने वाली एनसीपी सांसद फौजिया खान ने भी सरकार के रवैये को लोकतंत्र के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार बेहद ‘असहिष्णु’ हो गई है. फौजिया खान ने ईटीवी भारत से बात करते हुए सवाल उठाया कि यह कैसा नियम है जहां विपक्ष के नेता को बोलने से रोका जा रहा है? उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सदन में LoP को बोलने की आजादी नहीं दी जाएगी, तब तक विपक्ष भी चुप नहीं बैठेगा और न ही पीएम के भाषण में शामिल होगा.
प्रधानमंत्री का पलटवार और तंज
इससे पहले, सदन के भीतर जब विपक्ष “LoP को बोलने दो” के नारे लगा रहा था, तब प्रधानमंत्री मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि, “वे थक गए और चले गए.” पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान कांग्रेस पर काफी तंज कसा. उन्होंने नेहरू परिवार पर ‘गांधी जी’ के सरनेम चुराने तक का आरोप लगाया. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, ‘मोहब्बत कि दुकान चलाने वाले मोदी तेरी कब्र खोदेगी का नारा लगा रहे ये कैसी मोहब्बत की दुकान है.’
