नई दिल्ली, 01/01/2026
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार एक फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश किया. जिसमें युवा और खेल मंत्रालय के लिए 4479.88 आवंटित किए गए, जो कि पिछले बजट से 1000 करोड़ रुपये ज्यादा है. पिछले बजट में मंत्रालय को 3346.54 करोड़ रुपये का फंड दिया गया था.
आवंटन का विवरण
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), जो एथलीटों को ट्रेनिंग के लिए ज़रूरी मदद देने के लिए ज़िम्मेदार है, उसे 917.38 करोड़ रुपये का फंड दिया गया है, जो पिछले साल के 880 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है.
नेशनल डोप टेस्टिंग लैब और नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) का बजट क्रमशः 28.55 करोड़ रुपये से घटाकर 23 करोड़ रुपये और 24.30 करोड़ रुपये से घटाकर 20.30 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
खेलो इंडिया कार्यक्रम को 924.35 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है, जो पिछले साल के 1000 करोड़ रुपये से थोड़ा कम है. हालांकि, पिछले साल का अंतिम खर्च 700 करोड़ रुपये था.
राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भी सहायता में भारी बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि इसके लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित हुए है, जो पिछले साल के 28.05 करोड़ रुपये के आंकड़े से 78 प्रतिशत ज्यादा है. राष्ट्रमंडल खेल जुलाई-अगस्त में स्कॉटलैंड में होने वाले हैं.
अन्य सेक्टरों को आवंटन
नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी – 46.98 करोड़ रुपये (पिछले साल 78.64 करोड़ रुपये)
नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड – 5 करोड़ रुपये (पिछले साल 3 करोड़ रुपये)
खिलाड़ियों को प्रोत्साहन – 40 करोड़ रुपये (पिछले साल 28 करोड़ रुपये)
नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन – 425 करोड़ रुपये (पिछले साल 400 करोड़ रुपये)
इस बीच सरकार ने रविवार को जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेलो इंडिया मिशन का प्रस्ताव रखा, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगले दशक में भारत के खेल इकोसिस्टम को बदलने के उद्देश्य से खेलो इंडिया मिशन शुरू करने की घोषणा की.
खेलो इंडिया प्रोग्राम अब खेलो इंडिया मिशन बनेगा
केंद्रीय बजट 2026 पेश करते समय अपने भाषण में, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि खेलो इंडिया मिशन मौजूदा खेलो इंडिया कार्यक्रम को आगे बढ़ाएगा, जिसमें प्रतिभा की पहचान से आगे बढ़कर कोचिंग, प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और खेल विज्ञान में लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक कमियों को दूर किया जाएगा. सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, ‘खेल क्षेत्र रोजगार, कौशल और नौकरी के कई अवसर प्रदान करता है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार व्यवस्थित खेल प्रतिभा को बढ़ावा देना चाहती है, जिसे खेलो इंडिया प्रोग्राम के जरिए एक मिशन के तौर पर तय किया गया है.
यह मिशन गले दशक में खेलों के अलग अलग क्षेत्र में मदद करेगा, जैसे एकीकृत प्रतिभा विकास के लिए सेंटर खोलना, कोच और सपोर्ट स्टाफ का व्यवस्थित विकास कारना, खेल विज्ञान और टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना, खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतियोगिताएं और लीग आयोजित करना, ट्रेनिंग और प्रतियोगिता के लिए खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना और पूरे देश में एक मजबूत खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतियोगिताओं और लीगों के आयोजन को भी प्राथमिकता देना शामिल है.
बता दें कि खेलो इंडिया कार्यक्रम 2017 में शुरू किए गया था, जिसका मकसद जमीनी स्तर पर होनहार एथलीटों की पहचान करने के लिए विभिन्न आयु समूहों में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन पर ध्यान केंद्रित करना था.
इससे पहले एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि, वित्त मंत्री सीतारमण अगले 10 सालों में विश्व स्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए मल्टी-ईयर कैपिटल आउटले की घोषणा कर सकती हैं, जिसमें हर मुख्य ओलंपिक खेल के लिए ट्रेनिंग सेंटर, टैलेंट की पहचान करने के लिए एक अच्छी तरह से स्थापित सिस्टम और एक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स साइंस एंड रिसर्च शामिल है, जो एथलीट प्रमोशन से स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत है.
पिछले साल स्पोर्ट्स बजट क्या था?
पिछले साल के बजट में, खेल और युवा मामलों के मंत्रालय को 3,794.30 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जो 2024-25 के संशोधित अनुमानों से 17% ज्यादा था. जमीनी स्तर पर एथलीटों को खोजने और उनका पोषण करने के लिए केंद्र का प्रमुख खेलो इंडिया कार्यक्रम उस बजट का सबसे बड़ा लाभार्थी था. इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे. यह 2024-25 में 800 करोड़ रुपये के अनुदान से 200 करोड़ रुपये ज्यादा था.
भारत 2030 में अहमदाबाद में 100वें कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला है, इसलिए 2026-27 के बजट में आवंटन भी इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए सरकार की तैयारियों को उजागर करेगा.
पिछले बजट में, नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन को सहायता के लिए आवंटित राशि को मामूली रूप से 340 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया था. भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के लिए आवंटन 815 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 830 करोड़ रुपये कर दिया गया था.
