मुंबई, 18/01/2026
मायानगरी मुंबई में नगर निगम चुनाव के नतीजे आने के बाद असली ‘सियासी खेल’ अब शुरू हुआ है. 29 नगर निगमों की जंग में महायुति ने 25 पर कब्जा तो जमा लिया, लेकिन BMC की गद्दी पर कौन बैठेगा, इसे लेकर सस्पेंस फिल्म जैसा रोमांच पैदा हो गया है. बहुमत का आंकड़ा छू लेने के बावजूद डर ऐसा है कि अपने ही जीते हुए पार्षदों को कथित रूप से होटलों में ‘कैद’ करना पड़ा है.
हालांकि, पार्टी का कहना है कि पार्षदों के लिए ‘कार्यशाला’ का आयोजन किया गया है. वहीं, विपक्षी खेमे से संजय राउत ने तीखा हमला बोलते हुए इसे ‘लोकतंत्र का तमाशा’ करार दिया है. राउत का दावा है कि सत्ता में होने के बावजूद महायुति को अपने पार्षदों के टूटने का डर सता रहा है. फिलहाल, सभी की नजरें इस पर टिकीं हैं कि क्या बीजेपी और शिंदे की जोड़ी मुंबई की सत्ता पर अपना मेयर बिठाने में कामयाब होगी?
संजय राउत ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए शिवसेना शिंदे गुट पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, “जिन्होंने हमारे विधायकों को तोड़ा, अब उन्हें डर लग रहा है कि उनके नगरसेवक (कॉरपोरेटर्स) भी पाला बदल लेंगे. उन्होंने विधायकों को सूरत में रखा था और अब नगरसेवकों को मुंबई के होटलों में कैद कर दिया है. असल में, सूरत ही उनके लिए एकमात्र सुरक्षित जगह है. अगर राज्य में अपना मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्हें नगरसेवकों की खरीद-फरोख्त का डर सता रहा है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा तमाशा है.”
जब राउत से पूछा गया कि क्या नगरसेवक घर लौटेंगे, तो उन्होंने कहा, “कई नए नगरसेवक मूल रूप से शिवसैनिक हैं. हमें मिली जानकारी के अनुसार, वे भाजपा का मेयर नहीं चाहते. अगर नगरसेवकों को होटलों में बंद रखा जाता है, तो भी संचार के विभिन्न माध्यम मौजूद हैं. होटलों में बंद नगरसेवकों को रिहा किया जाना चाहिए.”
शिवसेना ने संजय राउत के बयान का खंडन किया है. पार्टी के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा- “होटल में नगरसेवकों को बंधक नहीं बनाया गया है. सभी नगरसेवकों को इसलिए बुलाया गया है क्योंकि हमारी पार्टी का प्रशिक्षण चल रहा है. पुराने नगरसेवक भी इसमें शामिल हुए हैं. पुराने और नए, दोनों तरह के नगरसेवक हिस्सा ले रहे हैं. उन्हें सिखाया जा रहा है कि अधिकारियों के साथ कैसे बातचीत करें, फंड का उपयोग कैसे करें और लोगों के बीच प्रभावी ढंग से काम कैसे करें.”
संजय राउत के बयान से पहले शनिवार को एक इवेंट में बोलते हुए, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के चीफ उद्धव ठाकरे ने कहा था कि अगर ‘भगवान’ की मर्ज़ी हुई, तो उनकी पार्टी का मेयर चुना जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे की पार्टी को अपनी सहयोगी BJP की पार्टी को तोड़ने की कोशिशों का डर है.
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच संजय राउत ने कहा, “नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद, मैंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे से मुलाकात की. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच भी चर्चा हुई है. हम सभी घटनाक्रमों को तटस्थ भाव से देख रहे हैं. लेकिन, पर्दे के पीछे बहुत कुछ हो रहा है. बीजेपी के पास बहुत मामूली बहुमत है और राजनीति में बहुमत पानी की तरह चंचल होता है.”
मुंबई नगर निगम चुनाव के बाद अब मेयर (महापौर) पद की रेस तेज हो गई है. इस बीच एकनाथ शिंदे ने अपने 29 नगरसेवकों को शहर के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है. वहां इन 29 नगरसेवकों के लिए तीन दिनों की कार्यशाला आयोजित की जा रही है. इस वर्कशॉप में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नए नगरसेवकों को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के कामकाज के बारे में जानकारी और मार्गदर्शन देंगे.
ऐसी खबरें आ रही हैं कि मुंबई नगर निगम चुनाव में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी से चुने गए कुछ नगरसेवक ‘नॉट रीचेबल’ (संपर्क से बाहर) हैं. मुंबई में महायुति गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद, यह चर्चा है कि शिवसेना (UBT) के कुछ नगरसेवक विपक्ष में बैठने के इच्छुक नहीं हैं और वे एकनाथ शिंदे की शिवसेना के संपर्क में हैं. हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
मुंबई मेयर चुनने का गणित समझिये
बीएमसी में कुल 227 वार्ड (सीटें) हैं. मेयर पद पर कब्जा करने और बहुमत साबित करने के लिए किसी भी गठबंधन या दल को कम से कम 114 सीटों की आवश्यकता होगी.
महायुति गठबंधन : बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन ने कुल 118 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है.
बीजेपी (BJP): 89 सीटें
शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट): 29 सीटें
शिवसेना (UBT): 65 सीटें
कांग्रेस : 24 सीटें
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना : 6 सीटें
AIMIM: 8 सीटें
NCP (अजीत पवार गुट): 3 सीटें
NCP (शरद पवार गुट): 1 सीट
समाजवादी पार्टी (SP): 2 सीटें
