नई दिल्ली, 12/01/2026
आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा एक अलग ही अवतार में नजर आए. संसद में अपनी तीखी बहस और स्टाइलिश लुक के लिए जाने जाने वाले चड्ढा ने दिल्ली की ठंड में ‘गिग वर्कर’ की भूमिका निभाई. उन्होंने एक क्विक कॉमर्स कंपनी की टी-शर्ट पहनी, कंधे पर डिलीवरी बैग लटकाया और स्कूटी पर सवार होकर घर-घर सामान की डिलीवरी देने निकल पड़े.
राघव चड्ढा का यह कदम कोई फिल्मी स्टंट नहीं, बल्कि गिग वर्कर्स के प्रति एकजुटता दिखाने का एक तरीका था. पिछले कुछ महीनों से वे संसद और सोशल मीडिया पर जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स के डिलीवरी पार्टनर्स के अधिकारों की मांग कर रहे हैं. उनका मानना है कि इन वर्कर्स का ‘एल्गोरिदम’ के जरिए शोषण हो रहा है. उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा “बोर्डरूम की चर्चाओं से दूर, आज मैंने जमीन पर उनकी जिंदगी जी. मैं उनके संघर्ष को करीब से समझना चाहता था.”
बताया था क्रूर कल्चर:
हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में भी चड्ढा ने ’10 मिनट डिलीवरी’ कल्चर को ‘क्रूर’ करार दिया था. उन्होंने तर्क दिया था कि चंद मिनटों में सामान पहुंचाने के दबाव में ये वर्कर्स अपनी जान जोखिम में डालते हैं, रेड लाइट जंप करते हैं और हादसों का शिकार होते हैं. इस मुहिम की शुरुआत तब हुई जब उत्तराखंड के एक डिलीवरी बॉय हिमांशु थपलियाल का वीडियो वायरल हुआ था. हिमांशु ने बताया था कि 15 घंटे की कड़ी मेहनत और 28 डिलीवरी करने के बाद भी उसने केवल 763 रुपये कमाए थे. राघव चड्ढा ने हिमांशु को अपने घर लंच पर बुलाकर उनका दर्द सुना था और अब वे खुद सड़कों पर उतरकर इस समस्या की गंभीरता को बता रहे हैं. केंद्र सरकार ने हाल ही में गिग वर्कर्स के लिए ‘सोशल सिक्योरिटी ड्राफ्ट रूल्स’ जारी किए हैं, जिसे राघव चड्ढा ने एक ‘छोटी लेकिन महत्वपूर्ण जीत’ बताया है
राघव चड्ढा की गिग वर्कर्स के लिए मांगें
न्यूनतम वेतन की गारंटी: काम के घंटों के आधार पर सम्मानजनक भुगतान.
सामाजिक सुरक्षा: पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना कवर.
मानवीय कार्य दशाएं: 10 मिनट जैसे जानलेवा टारगेट को खत्म करना.
