न्यूज डेस्क, 02/12/2026
साल 2025 श्रम सुधारों के लिहाज से अहम रहा. केंद्र सरकार ने 28 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर उनकी जगह चार नए लेबर कोड लागू किए. ये चार संहिताएं हैं—मजदूरी संहिता (2019), औद्योगिक संबंध संहिता (2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता (2020). ये सभी कानून 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माने जा रहे हैं और नए साल 2026 में इनके पूरी तरह लागू होने की संभावना है.
ड्राफ्ट नियम जारी, जनता से मांगे सुझाव
31 दिसंबर 2025 को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इन चारों लेबर कोड के तहत ड्राफ्ट नियमों को पूर्व-प्रकाशित कर दिया. मंत्रालय ने ड्राफ्ट अधिसूचना जारी होने की तारीख से 30 से 45 दिनों के भीतर कर्मचारियों, नियोक्ताओं और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा.
सैलरी का कैलकुलेशन कैसे होगा
ड्राफ्ट सेंट्रल नियम 2025 के अनुसार न्यूनतम मजदूरी पहले दैनिक आधार पर तय की जाएगी. इसके बाद एक मानक फॉर्मूले से इसे प्रति घंटा और मासिक वेतन में बदला जाएगा. मजदूरी तय करते समय एक औसत कामकाजी परिवार की जरूरतों—भोजन, कपड़े, मकान किराया, ईंधन, बिजली, शिक्षा, मेडिकल और अन्य बुनियादी खर्चों—को ध्यान में रखा जाएगा. खास बात यह है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय करेगी और राज्य इससे कम दर निर्धारित नहीं कर सकेंगे.
काम के घंटे और नाइट शिफ्ट
ड्राफ्ट नियमों में सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम करने का प्रावधान है. वेतन की गणना 8 घंटे के कार्य दिवस के आधार पर होगी. नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अलग से वेतन गणना के नियम तय किए गए हैं. महिला कर्मचारियों को उनकी सहमति और सुरक्षा व्यवस्था के साथ रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है.
समय पर वेतन और कटौती की सीमा
नए लेबर कोड के तहत समय पर सैलरी देना अनिवार्य होगा. वेतन से कुल कटौती अधिकतम 50 प्रतिशत तक ही हो सकेगी. बेसिक पे, डीए और अन्य भत्ते मिलाकर कुल सैलरी का कम से कम 50 प्रतिशत होना जरूरी होगा. यदि अलाउंस तय सीमा से ज्यादा होते हैं तो अतिरिक्त राशि अपने आप वेतन में जोड़ दी जाएगी.
ग्रेच्युटी और फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को राहत
अब ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की सेवा जरूरी नहीं होगी. एक साल की सेवा पूरी करने पर भी ग्रेच्युटी का हक मिलेगा. यह सुविधा फिक्स्ड टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को भी दी जाएगी. साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी पहली बार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाएगा, जिससे उन्हें PF, पेंशन और बीमा जैसे लाभ मिल सकेंगे.
