कोलकाता, 19/12/2025
दो साल में लगातार दो होम टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप होने से टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर आलोचनाओं के घेरे में हैं. अब उनके बारे में पूर्व कप्तान कपिल देव ने बड़ी बात बोली है. उनका कहना है कि गौतम गंभीर कोच नहीं हैं, वह भारतीय टीम के मैनेजर हैं.
कपिल देव में ये बातें गुरुवार को कोलकाता में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में दिया. उन्होंने कहा, ‘आधुनिक क्रिकेट में हेड कोच का मुख्य काम खिलाड़ियों को मैनेज करना होता है, न कि सीधे कोचिंग देना.’
गंभीर की ही कोचिंग में पिछले साल भारतीय टीम अपने घर पर न्यूजीलैंड से 3-0 से हार गई थी और अब इस साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 0-2 हार गए, जिसकी वजह से गंभीर की कोचिंग स्टाइल सवालों के घेरे में हैं.
कोच की परिभाषा क्या है?
इसी बारे में पूछे जाने पर कपिल ने कहा, ‘आज कल कोच शब्द का इस्तेमाल बहुत आसानी से किया जाता है, लेकिन गौतम गंभीर कोच नहीं हो सकते, वह टीम के मैनेजर हैं.’ तो कोच की परिभाषा क्या है? तो उन्होंने कहा, ‘जो लोग स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाते हैं, वे असली कोच होते हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, हर कोई एक्सपर्ट होता है. एक हेड कोच लेग-स्पिनर या विकेटकीपर को कैसे सिखा सकता है? यहां असली काम मैनेज करना है.
मैनेजर या कप्तान की जिम्मेदारी
तो एक मैनेजर या कप्तान की भूमिका क्या है? अपनी कप्तानी के फलसफे को समझाते हुए विश्व चैंपियन ने कहा, ‘एक मैनेजर या कप्तान की जिम्मेदारी खिलाड़ियों में आत्मविश्वास जगाना है. जो अच्छा नहीं खेल रहे हैं, उनके साथ खड़े रहना. मैं उन लोगों के साथ समय बिताना पसंद करूंगा जो फॉर्म में नहीं हैं, बजाय इसके कि उन लोगों के साथ डिनर करूं जो शतक बना रहे हैं.’ कपिल ने आगे कहा, ‘सबसे बड़ा काम टीम को एक साथ रखना है. सिर्फ आपका अपना प्रदर्शन ही सब कुछ नहीं होता.
आधुनिक क्रिकेट के हिसाब से खुद को ढाल नहीं पाए
कई लोग कहते हैं कि पुराने जमाने के क्रिकेटर आधुनिक क्रिकेट के हिसाब से खुद को ढाल नहीं पाए. इन दावों को खारिज करते हुए कपिल ने कहा कि अगर वह आज के दौर में खेलते, तो सुनील गावस्कर टी20 के सबसे अच्छे बल्लेबाज होते. कपिल का मानना है कि जिनका डिफेंस मजबूत होता है, उनके लिए बड़े शॉट मारना आसान होता है. डिफेंस सीखना सबसे मुश्किल होता है. उन्होंने इस दिन कोलकाता के क्रिकेट कल्चर की भी तारीफ की. 1983 वर्ल्ड कप जीत का राज बताते हुए कपिल ने कहा, ‘विश्वास सब कुछ बदल देता है. टूर्नामेंट के बीच में ही टीम को यकीन हो गया था कि हम यह कर सकते हैं.’
