शिमला, 17/12/2025
कुछ साल पहले तक दिसंबर महीने में शिमला शहर में बर्फ की सफेद चादर में ढकी छतें, पेड़ों पर जमी बर्फ और सड़क किनारे लगे बर्फ के ढेर ये सब नजर आता था. कुफरी, रिज मैदान, माल रोड, बर्फ से ढकी पहाड़ियां, हल्का नीला आसमान और ठंडी हवा ये नजारे मिलकर शिमला को पहाड़ों की रानी बनाते हैं. है, लेकिन अब ये सब शिमला में देखने को बहुत कम मिल रहा है.
शिमला शहर की पहाड़ियां जो कभी दिसंबर आते ही बर्फ की सफेद चादर ओढ़ लिया करती थी, आज बिना बर्फबारी से सूनी पड़ी हैं और पर्यटकों की राह देख रही हैं. दिसंबर के महीने में बर्फ के फाहे गिरते ही शिमला में बाहरी राज्यों के पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ती थी, लेकिन अब बीते तीन सालों से नजारे देखने को नहीं मिलते. इस साल भी दिसंबर का महीना आधा बीत चुका है, लेकिन आसमान से एक भी बर्फ का फाहा नहीं गिरा. मौसम के इस बदले मिज़ाज ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को निराश किया है, बल्कि उन सैलानियों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है, जो दिसंबर में बर्फ की चादर बिछने की उम्मीद लिए शिमला आते हैं.
20 दिसंबर के बाद ही होती है बर्फबारी
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के सीनियर साइंटिस्ट संदीप कुमार शर्मा का कहना है कि ‘पिछले 10 साल की आंकड़े देखने पर पता चलता है कि शिमला शहर में 20 दिसंबर के बाद ही बर्फबारी होती है. ओवरऑल दिसंबर में एक या दो स्पेल बर्फबारी के देखे गए हैं. हालांकि बीते 4 वर्षों में दिसंबर 2021 से दिसंबर 2024 तक देखें तो इस दौरान वर्ष 2022, 2023, 2024 में 3 सालों में कोई बर्फबारी दर्ज नहीं की गई है. इसी तरह से वर्ष 2021 में भी दिसंबर में हल्की बर्फबारी हुई थी. 2014 में तीन स्पेल बर्फबारी के दर्ज किए गए थे. इस दौरान कम्युलेटिव 40 सेंटीमीटर के आसपास बर्फबारी रिकॉर्ड की गई थी. शिमला शहर या हिमाचल में दिसंबर के थर्ड वीक में ही बर्फबारी की संभावना रहती है. कुछ वर्ष ऐसे भी रहे हैं जब 12 या 13 दिसंबर के आसपास बर्फबारी दर्ज की गई है. इसमें 2012 में और वर्ष 2018 में सेकेंड वीक में बर्फबारी का एक स्पेल देखा गया है. 2010 से वर्ष 2024 तक सबसे अधिक 38 सेंटीमीटर बर्फ गिरी है. 2012 में दिसंबर में बर्फबारी के 2 स्पेल हुए और 9 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई थी. 2018 में 2 स्पेल में 7.1 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई. 2019 में 20 सेंटीमीटर, 2020-2021 में भी मात्र 1 सेंटीमीटर बर्फबारी दिसंबर माह में रिकॉर्ड की गई थी.’
ग्लोबल वार्मिंग से वेस्टर्न डिस्टरबेंस हो रही प्रभावित
एक्सपर्ट समय पर बर्फबारी न होने की वजह ग्लोबल वॉर्मिंग को मानते हैं. धरती पर तापमान बढ़ने के कारण वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण बारिश और बर्फबारी होती है. पश्चिमी विक्षोभ वास्तव में भूमध्य सागर के आसपास बनने वाला एक कम दबाव का क्षेत्र होता है, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ता हुआ ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर भारत में प्रवेश करता है. इसके साथ आने वाली नमी और ठंडी हवाएं उत्तर भारत के मौसम में बड़ा बदलाव ले आती हैं. दिसंबर महीने में अभी तक दो से तीन बार सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहे हैं। जिसका दायरा और प्रभाव कम रहा है। जिससे इस दौरान प्रदेश के अधिक ऊंचाई वाले लाहौल स्पीति, चंबा, कांगड़ा व कुल्लू में कुछेक स्थानों पर ही हल्की बर्फबारी हुई है.
ग्लेशियर हो रहे प्रभावित
हिमालय नीति अभियान के अध्यक्ष कुलभूषण अभिमन्यु का कहना है कि ‘हिमाचल में सर्दियों के मौसम में होने वाली बारिश और बर्फबारी वेस्टर्न डिस्टरबेंस से ही होती है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी प्रभावित हुई है, जिस कारण बर्फबारी कम हो रही है. हिमाचल में 13 जनवरी से पहले गिरने वाली बर्फ ही जमीन पर अधिक समय के लिए टिकती, जो ग्लेशियरों को भी फीड करती है. लेकिन अब बर्फबारी कम होने से इसका प्रभाव ग्लेशियर पर भी दिखने लगा है.’
सर्दियों में बर्फ पड़ने पर आता है टूरिस्ट
शिमला शहर और आस पास के क्षेत्रों में समय पर बर्फबारी न होने से पर्यटन कारोबारियों, बागवानों को भारी नुकसान होता है. बर्फ देखने के लिए ही लोग शिमला आते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से टाइम पर न बर्फबारी हो रही है और न बारिश गिर रही है. इससे होटल, टैक्सी संचालक और बागवान परेशान हैं.
पर्यटन कारोबार हो रही प्रभावित
शिमला में प्रीपेड टैक्सी यूनियन के देवराज शर्मा का कहना है कि ‘यहां पर टूरिस्ट अभी बहुत काम आ रहा है. बर्फ पड़ने पर ही यहां टूरिस्ट आता है. पिछले 5 से 7 सालों से ऐसा ही चल रहा है. दिन प्रतिदिन काम कम होता जा रहा है. अभी तक लंबी दूरी का कोई चक्कर नहीं लगा है. बर्फ न गिरने से कुफरी, चायल और नारकंडा के लिए टूरिस्ट ले जाने वाला लोकल काम भी नहीं चल रहा है. बर्फ गिरने पर ही काम रफ्तार पकड़ता है. सर्दियों में 25 दिसंबर से 31 तक जो काम चलता था, वो भी खत्म हो गया है. बर्फ न गिरने से हिमाचल सहित बाहरी राज्यों में सभी टैक्सी चालकों का काम प्रभावित होता है. शिमला में पंजाब, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, यूपी, राजस्थान समेत कई राज्यों से टैक्सियां आती हैं, लेकिन बर्फ न गिरने से जब टूरिस्ट नहीं आएगा तो टैक्सी का काम कैसे चलेगा.’
10 साल में घूमने आए पर्यटकों की संख्या
पर्यटन विभाग के मुताबिक पिछले 10 सालों में हिमाचल में घूमने आए पर्यटकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2015 में 1 करोड़ 75 लाख 31 हजार 153 भारतीय और विदेशी पर्यटकों ने हिमाचल के विभिन्न पर्यटन स्थलों में पहुंचे थे. इसी तरह से वर्ष 2016 में 1 करोड़ 84 लाख 50 हजार 520, 2017 में 1 करोड़ 96 लाख 01 हजार 533, 2018 में 1 करोड़ 64 लाख 50 हजार 503, वर्ष 2019 में 1 करोड़ 72 लाख 12 हजार 107, 2020 में 32 लाख 13 हजार 379, 2021 में 56 लाख 37 हजार 102, 2022 में 1 करोड़ 51 लाख 00 हजार 277, वर्ष 2023 में 1 करोड़ 60 लाख 04 हजार 924 और 2024 में 1 करोड़ 81 लाख 24 हजार 694 भारतीय और विदेशी पर्यटक हिमाचल के विभिन्न पर्यटक स्थलों में घूमने आए थे.
बर्फबारी पर निर्भर कारोबार
होटल कारोबारी अतुल गौतम का कहना है, ‘हिमाचल में सर्दियों के मौसम में पर्यटन कारोबार अच्छी बर्फबारी पर निर्भर है. क्रिसमस और नए साल पर 20 से 31 दिसंबर तक शिमला में हमेशा ही सैलानियों की काफी भीड़ उमड़ती है, लेकिन अगर दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में अच्छी बर्फबारी होती है तो पूरा महीना ही शिमला सहित प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की भीड़ जुटती है. इसी तरह से जनवरी के पहले सप्ताह में होने वाली अच्छी बर्फबारी से भी फरवरी महीने तक काफी अधिक संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. वहीं ये पर्यटक बर्फबारी के मजा लेने को लंबे समय तक शिमला सहित अन्य पर्यटन स्थलों में रुकते हैं, जिससे होटल सहित अन्य कारोबार भी अच्छा चलता है.’
वहीं, इसका असर बागवानों पर भी होता है. बागवान संजीव चौहान का कहना है कि ‘दिसंबर महीने में अच्छी बर्फबारी अधिक समय तक टिकती है, जिससे सेब के लिए जरूरी चिलिंग आवर्स तय समय में पूरे होते हैं. ये बर्फ धीरे धीरे पिघलती है, ऐसे में बगीचे में लंबे समय तक के लिए नमी बनी रहती है. इससे सेब की अच्छी पैदावार होने के साथ फ्रूट की क्वालिटी भी बढ़िया रहती है. ठंड रहने से फसल को कीट पतंगे भी नुकसान नहीं पहुंचते.’
कैसे रहेगा मौसम
16 से 19 दिसंबर तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ बना रहेगा. जिला बिलासपुर, मंडी व हमीरपुर में सुबह के समय धुंध छाए रहने की संभावना है. इसको लेकर अलर्ट जारी किया गया है. उसके बाद 20 दिसंबर देर रात से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा. उसका प्रभाव जिला लाहौल स्पीति, कुल्लू व कांगड़ा की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहेगा. इसी तरह से 21 दिसंबर को संभावना है कि जिला चंबा, लाहौल स्पीति, कुल्लू,कांगड़ा और किन्नौर में ऊंचाई वाले स्थानों में हल्की बर्फबारी हो सकती है. इसके अलावा कम ऊंचाई वाले जिला सिरमौर, सोलन और शिमला में बारिश की संभावना कम है. इस दौरान यहां बादल छाए रहेंगे.
