नई दिल्ली, 10/12/2025
लोकसभा में मंगलवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा शुरू हुई थी. कांग्रेस की तरफ से ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए कहा गया था कि ईवीएम पर लोगों को संदेह है. राज्यों के चुनाव बैलेट पेपर से कराने चाहिए. इसके साथ ही राहुल गांधी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर मिलीभगत के आरोप लगाए थे.
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान चुनाव सुधारों पर बहस के दौरान मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने बुधवार को कांग्रेस के इन आरोपों का जवाब दिया और खूब निशाना साधा. उन्होंने कहा कि एक नए सांसद के रूप में उनका यह पहला वर्ष विशेष रूप से विपक्ष के व्यवहार के कारण अत्यंत चिंताजनक और मानसिक रूप से पीड़ादायक (ट्रॉमैटिक) रहा है. पूरे वर्ष विपक्ष ने संसद को सुचारु रूप से चलने नहीं दिया. हर दिन सदन में तमाशा, नारेबाजी, वेल में आना, डराना-धमकाना और धक्कामुक्की यह सब लोकतंत्र का अपमान है. हम यहां जनता की आवाज बनने आए हैं, सीखने आए हैं, लेकिन विपक्ष ने संसदीय मर्यादाओं को रौंदने का काम किया है
ब्राजीलियाई महिला माफी मांगी
कंगना रनौत ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘कल राहुल गांधी बोल रहे थे. पूरे देश को उनसे किसी बड़े खुलासे की उम्मीद थी, लेकिन उनके भाषण में न कोई ठोस तथ्य था, न कोई ठोस मुद्दा. बस वो वही बोल रहे थे कि खादी है उसमें धागा और फिर उसमें लोग है, जब उनसे सीधे मुद्दे पर बात करने को कहा गया, तो अंत में वो ले देकर विदेशी महिला की फोटो पर आ गए. वो खुद कई बार कह चुकी हैं कि कभी भारत नहीं गई हूं. उनकी तस्वीर का प्लेकार्ड में इस्तेमाल किया. बिना प्रमाण उनकी फोटो का उपयोग कर उनके व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन किया गया. कंगना रनौत ने कहा, ‘एक महिला सांसद होने के नाते मैं पूरे सदन की ओर से उस महिला से सार्वजनिक रूप से माफी मांगती हूं. यह महिलाओं के सम्मान पर आघात है.’
‘मोदी ईवीएम नहीं, दिल हैक करते हैं’
कंगना रनौत ने कहा कि जो पार्टी महिलाओं के सम्मान की दुहाई देती है, वही बार-बार महिलाओं का अपमान भी करती है. इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’’ उज्ज्वला योजना, शौचालय, छात्रवृत्तियां और आत्मनिर्भर महिला योजनाएं देश में महिलाओं को वास्तविक सम्मान और सशक्तिकरण दे रही हैं. प्रधानमंत्री ईवीएम को हैक नहीं करते, वो देशवासियों के दिलों को हैक करते हैं. कंगना ने कहा कि, ‘ये लोग (कांग्रेस) पुराने जमाने के दकियानूस तौर तरीके से चुनाव कराने, बैलेट पेपर पर वोटिंग कराने की वकालत कर रहे हैं, लेकिन ये इंदिरा गांधी और राजनारायण के केस को भूल गए. ये केस इतिहास में दर्ज है. वोट चोरी और वोटों की धांधली के लिए एक नेता ने एक प्रधानमंत्री पर केस किया और वो पकड़ी गईं. उन्हें रातों रात कुर्सी छोड़नी पड़ी. इसलिए कांग्रेस बार-बार ईवीएम पर हार का ठीकरा फोड़ती है. कांग्रेस ईवीएम पर अनर्गल आरोप लगाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अविश्वास फैलाने का काम कर रही है.
सोनिया गांधी की नागरिकता पर उठाए सवाल
कंगना ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को भी निशाना बनाया और सवाल किया कि उनकी मां और कांग्रेस की दिग्गज नेता सोनिया गांधी ने कथित तौर पर नागरिक बनने से पहले कैसे मतदान किया. उन्होंने कहा कि आपकी माता जी के पास नागरिकता भी नहीं थी. 1983 में उनके पास नागरिकता आई, लेकिन वो इससे पहले से वोट देती आई हैं. आप लोगों के चरित्र में मर्यादा नहीं है. इस देश के कानून मर्यादा और संविधान का आपने सम्मान नहीं किया.
‘बिहार में SIR से 60 लाख फर्जी वोटर हटे’
कंगना ने कहा कि बिहार में SIR लागू होने के बाद 60 से 65 लाख अवैध या निष्क्रिय वोटर कार्ड हटाए गए, जिसमें घुसपैठियों की संख्या बेहद कम थी. इसमें ज्यादातर वो लोग शामिल थे जो या तो दूसरे राज्यों में पलायन कर गए हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी थी. अगर ये वोटर असल में मौजूद होते तो अपना नाम हटने के खिलाफ आपत्ति दर्ज करवा सकते थे. 21 लाख नए वास्तविक वोटर जोड़े गए इस पूरे अभियान के बाद बिहार में पहली बार रिकॉर्ड तोड़ 67 प्रतिशत मतदान हुआ. इससे यह सिद्ध होता है कि चुनावी शुद्धता से ही जनता का लोकतंत्र पर विश्वास मजबूत होता है।
वन नेशन–वन इलेक्शन पर भी बोली कंगना
कंगना रनौत ने देशहित में वन नेशन–वन इलेक्शन को समय की आवश्यकता बताया. उन्होंने कहा कि बार-बार चुनावों के कारण न केवल 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि प्रशासन, सुरक्षा बल, सरकारी संसाधन और आम नागरिक भी अत्यधिक थकान और दबाव में आ जाते हैं. उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से लोकतंत्र को एक उत्सव के रूप में मनाया जा सकेगा और देश की अर्थव्यवस्था, प्रशासनिक दक्षता और नागरिक सुविधा तीनों को लाभ होगा. भाजपा केवल सत्ता की राजनीति नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक भविष्य को मजबूत करने की राजनीति करती है. विपक्ष अराजकता और भ्रम फैलाकर लोकतंत्र को कमजोर करना चाहता है, लेकिन भाजपा संसद से लेकर सड़कों तक संविधान, मर्यादा और जनादेश की रक्षा के लिए डटकर खड़ी है.
