मुंबई, 09/12/2025
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, क्योंकि हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने व्यापक मुनाफावसूली की. इससे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज हुई और बाजार की धारणा भी कमजोर पड़ी.
बाजार में कमजोरी तब और बढ़ गई जब यह खबर सामने आई कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत के चावल पर नए शुल्क लगाने पर विचार कर सकते हैं. इससे भारत-अमेरिका के बीच लंबित व्यापार वार्ताओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई और निवेशकों में सतर्कता देखी गई.
दिन के अंत में सेंसेक्स 436.41 अंक या 0.51 फीसदी टूटकर 84,666.28 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 120.90 अंक या 0.47 फीसदी गिरकर 25,839.65 पर आ गया.
कई दिग्गज शेयरों ने बाजार को नीचे खींचा. एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, मारुति सुज़ुकी, सन फार्मा, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस जैसे भारीभरकम शेयरों में तेज गिरावट देखी गई. इन शेयरों में कारोबार के दौरान 4.6 प्रतिशत तक की गिरावट आई, जिससे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा.
हालांकि कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई और बाजार को सीमित सहारा दिया. एटरनल, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल और एसबीआई जैसे स्टॉक्स हरे निशान में बंद हुए.
दिलचस्प रूप से, ब्रॉडर मार्केट ने बेहतर प्रदर्शन किया. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.32% की बढ़त देखी गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.14% चढ़ा. इससे संकेत मिलता है कि मिड- एवं स्मॉल-कैप शेयरों में खरीदी की रुचि बनी हुई है, भले ही प्रमुख इंडेक्स दबाव में रहे हों.
सेक्टोरल मोर्चे पर भी दबाव स्पष्ट रहा. निफ्टी आईटी, ऑटो और फार्मा सहित अधिकांश सेक्टर लगभग 1 प्रतिशत नीचे रहे. इसके अलावा पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, मीडिया, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और केमिकल्स जैसे सेक्टर भी पूरे सत्र में कमजोरी में रहे.
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक व्यापार से जुड़ी चिंताएं और लगातार मुनाफावसूली बाजार पर भार डाल रही हैं. निवेशक अमेरिका-भारत शुल्क विवाद पर आने वाली किसी भी नई जानकारी का इंतजार कर रहे हैं, जिससे निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में केंद्रीय बैंक की टिप्पणियां, रुपये की चाल और एफआईआई की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करेंगी. घरेलू आर्थिक मजबूती हालांकि नीचे की ओर जोखिम को सीमित कर सकती है.
वैश्विक कारकों पर नजर रखते हुए उन्होंने कहा, “बाजार को फेड के 25 बेसिस प्वाइंट की संभावित दर कटौती और बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि की उम्मीद है. हालांकि, वर्ष 2026 के लिए फॉरवर्ड गाइडेंस अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा.” इस बीच, हल्की रिकवरी और शॉर्ट कवरिंग के चलते रुपया 23 पैसे मजबूत होकर 89.82 पर बंद हुआ.
