झज्जर, 06/12/2025
हरियाणा में विदेशी पक्षियों की संख्या बढ़ती जा रही है. झज्जर के डीघल गांव में इन पक्षियों ने डेरा डाला हुआ है. इनमें बार हेडेड गूज पक्षी खास है. बार हेडेड गूज पक्षी की खासियत ये है कि ये 29 हजार फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है. यह दुनिया के सबसे ऊंची उड़ान भरने वाले पक्षियों में से एक है.
पक्षी प्रेमियों के लिए अच्छी खबर ये है कि इस बार दुर्लभ पक्षी भी देखने को मिल रहे हैं. आजकल आप डीघल गांव के आसपास के जलभराव वाले क्षेत्रों में दुर्लभ नजारा देख सकते हैं. दुनिया में सबसे ऊंची उड़ान भरने की क्षमता रखने वाले बार हेडेड गूज पक्षी भी आपको यहां देखने को मिल सकते हैं.
बार हेडेड गूज पक्षी के अलावा आपको यहां ग्रे लेग गूज, नॉर्थन पिनटेल, नॉर्थन शोवलर, गैडवाल, कॉमन पोचार्ड, कॉमन जैसे प्रजातियों के पक्षी देखने को मिल जाएंगे. ये सभी पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंचे हैं. 200 से 1000 के समूह में उड़ान भरकर ये एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं.
सर्दी के दिनों में हिमालय के आसपास ज्यादा बर्फ जमने के कारण प्रवासी पक्षियों को उनका भोजन नहीं मिल पाता. इसकी खोज में वो वहां से उड़ान भरते हैं और डीघल और जिले के आसपास के क्षेत्रों आ जाते हैं. फिलहाल डीघल के करीबी क्षेत्रों में इन्होंने डेरा डाला हुआ है. इन पक्षियों का नवंबर के महीने में आना शुरू हो जाता है. मार्च में फिर से ये मूल क्षेत्रों की तरफ निकल जाते हैं.
झज्जर के बर्ड वॉचर जगत वर्मा ने बताया “मैं 1986 से इस फील्ड में हूं. यहां अभी तक हमने देश विदेश के लगभग 185 प्रजातियों के पक्षियों का आना दर्ज किया है. इस सर्दी के सीजन में विदेशी पक्षी या यूं कहें कि प्रवासी पक्षी बड़ी संख्या में आते हैं. जिनके ऊपर हम अध्ययन करते हैं. अभी जो पक्षी आए हुए हैं, वो बार हेडेड गूज हैं. ये पक्षी साइबेरिया से आते हैं. इसमें सबसे ऊंची उड़ान भरने की क्षमता है. ये पक्षी हिमालय के ऊपर से आता है. ये बहुत शांत पक्षी होता है. करीब पांच महीने ये यहां रुकता है और फिर वापस चला जाता है. इसकी खासियत ये ही दुनिया में सबसे ऊंची उड़ने की क्षमता इसके पास है. ये भारत में सबसे पहले पहुंचता है.”
बर्ड वॉचर जगत वर्मा ने बताया “हरियाणा में सर्दी के मौसम में गेहूं और सरसों की खेती होती है. इन फसलों में कई तरह के कीट मंडराते हैं. जिनको आहार बनाकर ये गुजारा करते हैं. इसलिए हर साल ये पक्षी यहां आते हैं. यहां उन्हें खाने की तलाश में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती. ये सदियों से यहां आ रहे हैं. ये यहां खाने और पानी की तलाश में आते हैं. अधिकतर पक्षी 100 से 150 मीटर के दायरे में ही रहते हैं. इस समय इनके प्रजनन की संभावना बेहद कम होती है.
