न्यूज डेस्क, 03/12/2025
मंगल ग्रह की डिटेल्स जानने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक हमेशा एक्साइटेड रहते हैं, लेकिन इस बार वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह के बारे में जो नई जानकारी मिली है, वो इस लाल ग्रह की स्टडी को एक नया मोड़ दे सकती है. दरअसल, नासा के वैज्ञानिकों को पहली बार मंगल की धूलभरी हवा में छोटे बिजली के तड़के यानी मिनी लाइटनिंग देखने को मिली है. यह बेहद कम दूरी वाले इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज हैं, जिन्हें NASA के Perseverance रोवर ने अपने सुपर सेंसिटिव माइक से कैप्चर किया.
कुल 55 इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज पकड़े
रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी आवाजें तेज हवाओं और धूल भरी आंधियों के दौरान रिकॉर्ड हुईं. इन छोटे स्पार्क्स की क्रैकलिंग साउंड से साफ पता चलता है कि मंगल ग्रह की धूल, आपस में रगड़ खाकर इलेक्ट्रिक चार्ज बना सकती है. लगभग दो मंगल वर्षों में रिसर्च टीम ने करीब 28 घंटों की रिकॉर्डिंग का एनालिसिस किया और कुल 55 इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज पकड़े.
यह मिनी-लाइटनिंग आखिर होती कैसी है?
यह बिजली धरती की तरह आसमान में चमकने वाली नहीं होती. इसके हर स्पार्क बस कुछ सेंटीमीटर लंबा होता है और एक हल्का सा झटका पैदा करता है, जैसे हमारे यहां स्टैटिक बिजली से छोटी सी चिंगारी उठती है. मंगल की बेहद पतली हवा में यह छोटा इफेक्ट भी काफी इंट्रेस्टिंग है.
ये स्पार्क्स मंगल ग्रह की केमिस्ट्री को कैसे बदलते हैं?
वैज्ञानिकों को काफी समय से मंगल ग्रह पर मिलने वाले ऑक्सिडेंट्स समझ नहीं आते थे. अब पता चला है कि ये माइक्रो-लाइटनिंग खास तरह के रिएक्टिव कंपाउंड जैसे हाइड्रोजन पेरोक्साइड बनाती है. ये ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे पुराने जीवन के सबूत ढूंढना और मुश्किल हो जाता है. साइंस न्यूज़ के अनुसार ये स्पार्क्स इंसानों को सीधे नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन लंबे समय में ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर असर डाल सकते हैं.
रोवर्स और स्पेससूट्स को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा
वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले मिशनों में मंगल ग्रह की इलेक्ट्रिक फील्ड को मॉनिटर करने वाले नए इंस्ट्रूमेंट जरूरी होंगे. इससे रोवर्स और स्पेससूट्स को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा. नेचर जर्नल में पब्लिश यह स्टडी मंगल ग्रह की वेदर और केमिस्ट्री को समझने के लिए एक नया दरवाजा खोलती है.
