जींद, 14/10/2025
रोहतक के एएसआई संदीप लाठर की खुदकुशी के बाद परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया है. फिलहाल डेड बॉडी को रोहतक में ही लाढ़ौत रोड पर उनके घर में ले जाया गया है. वहीं परिजनों ने कहा है कि वाई पूरन कुमार की पत्नी आईएएस अमनीत पी कुमार की गिरफ्तारी के बगैर अब संदीप का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.
अमनीत पी कुमार की गिरफ्तारी की मांग
रोहतक साइबर सेल में तैनात एएसआई संदीप के सुसाइड मामले में परिजनों का आक्रोश देखने को मिल रहा है. जींद के जुलाना में रह रहे संदीप के चाचा के बेटे शीशपाल आर्य ने कहा है कि “आईएएस अमनीत पी कुमार की गिरफ्तारी के बगैर संदीप का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि वाई पूरन सिंह की पत्नी और उनके समर्थकों पर केस दर्ज किया जाना चाहिए. एएसआई संदीप कुमार जींद के जुलाना के रहने वाले हैं. फिलहाल वे रोहतक में अपने मामा के घर रहते थे और एक साल से रोहतक के साइबर सेल में तैनात थे
वाई पूरन कुमार की संपत्ति की जांच हो !
शीशपाल आर्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि “उनका भाई मरा नहीं है, बल्कि दबाव डालकर मरवाया गया है. संदीप बहुत ही ईमानदार पुलिस अधिकारी था. वाई पूरन कुमार की संपत्ति की जांच होनी चाहिए. अब देखते हैं कि वाई पूरन कुमार के घर जाने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा यहां भी आते हैं कि नहीं. बुधवार को सभी परिजन और रिश्तेदार जमा होंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे. जो लोग चंडीगढ़ में आईपीएस वाई पूरन कुमार के घर धरने पर बैठे थे और समर्थक थे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए. इससे पहले भी कई आत्महत्याएं हुई हैं,लेकिन कोई भी बड़ा नेता वहां नहीं गया. भिवानी की मनीषा के मामले में भी कोई बड़ा नेता पीड़ित परिवार से मिलने नहीं गया.
डेड बॉडी को ग्रामीणों ने पुलिस को सौंपने से इंकार कर दिया ?
रोहतक जिला पुलिस की साइबर सैल के एएसआई संदीप लाठर की खुदकुशी के बाद डेड बॉडी को ग्रामीणों ने पुलिस को सौंपने से इंकार कर दिया है. मंगलवार शाम को ग्रामीण डेड बॉडी को ट्रैक्टर ट्रॉली में रोहतक जिले के लाढ़ौत गांव में मामा के घर ले गए. फोरेंसिक और पुलिस जांच के बाद ग्रामीणों ने डेड बॉडी को कब्जे में ले लिया. ग्रामीणों ने पूरे मामले में न्याय की मांग की
जुलाना में मातम का माहौल
संदीप की आत्महत्या की ख़बर के बाद से जींद के जुलाना में मातम छाया हुआ है. उनका परिवार जुलाना कस्बे के वार्ड नंबर चार में रहता है. संदीप की आत्महत्या की खबर जैसे ही जुलाना पहुंची तो पूरे क्षेत्र में मातम छा गया. रविवार को ही संदीप अपने घर आया था लेकिन मंगलवार को उसकी मौत की सूचना मिलते ही परिवार और आस-पास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई.
2007 में पुलिस की नौकरी जॉइन की थी
संदीप का परिवार सेवा और त्याग की परंपरा से जुड़ा रहा है. उनके पिता दयानंद पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर थे. रिटायरमेंट के बाद करीब 20 वर्ष पहले वे रेल से सफर के दौरान हादसे का शिकार हो गए थे जिसमें उनकी मौत हो गई थी. संदीप के दादा भरत सिंह भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके थे और उन्हीं से प्रेरित होकर संदीप ने पुलिस की नौकरी को चुना था. 2007 में संदीप ने पुलिस की नौकरी जॉइन की थी. 15 अगस्त को रोहतक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संदीप को सम्मानित किया था.
संदीप की मौत से जुलाना में मातम
शीशपाल ने बताया कि संदीप के परिवार में उसकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है. बड़ी बेटी प्रतिभा नीट की तैयारी कर रही है, जबकि छोटी बेटी नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है. बेटा राणू अभी चौथी कक्षा का छात्र है. लगभग पांच साल पहले संदीप अपने परिवार के साथ रोहतक में शिफ्ट हो गया था, जहां वो नौकरी कर रहा था. जुलाना में उसने मकान के नीचे के हिस्से को किराये पर दे रखा है तो उपर वाला हिस्सा अपने लिए रखा हुआ है. रविवार को संदीप अपने घर आया था और सफाई करके चला गया था. संदीप अपने युवा दिनों में सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहता था. वो जुलाना युवा क्लब का प्रधान भी रहा और कई रक्तदान शिविरों एवं पौधारोपण अभियानों में उसने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. उसके सहयोगी उसे एक मिलनसार, मददगार और समाजसेवी युवक के रूप में याद कर रहे हैं. संदीप की मौत ने पूरे कस्बे को झकझोर दिया है.
