चंडीगढ़, 25/10/2026
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल के चंडीगढ़ पहुंचने से पहले पार्टी को बड़ा झटका लगा है। जलालाबाद से कांग्रेस के पूर्व विधायक रमेंद्र सिंह आवला ने कांग्रेस छोड़कर शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया है। वह रविवार को चंडीगढ़ में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए।
सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई में अकाली दल में शामिल हुए आवला
रमेंद्र सिंह आवला के अकाली दल में शामिल होने के दौरान पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल मौजूद रहे। बादल ने उनका पार्टी में स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि उनके आने से जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में भी पार्टी को मजबूती मिलेगी सुखबीर बादल ने कहा कि रमेंद्र सिंह आवला के पार्टी में शामिल होने से अकाली दल को क्षेत्र में अपना आधार मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की उम्मीद भी जताई।
क्षेत्रीय पार्टी के योगदान से प्रभावित होकर लिया फैसला: आवला
अकाली दल में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए रमेंद्र सिंह आवला ने कहा कि पंजाब की राजनीति में क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसी योगदान को देखते हुए उन्होंने कांग्रेस छोड़कर अकाली दल में शामिल होने का फैसला किया है। उनके इस कदम को पंजाब की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आवला का फिरोजपुर और फाजिल्का जिलों में राजनीतिक प्रभाव रहा है। ऐसे में उनके अकाली दल में शामिल होने से पार्टी को इन क्षेत्रों में अपना जनाधार मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
2019 में जलालाबाद से बने थे विधायक
रमेंद्र सिंह आवला ने वर्ष 2019 में जलालाबाद विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार राज सिंह डिब्बीपुरा को हराया था। इस जीत के साथ उन्होंने उस सीट पर अकाली दल को चुनौती दी थी, जिसे पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता था। आवला वर्ष 2019 से 2022 तक पंजाब विधानसभा में जलालाबाद का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी वह कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे। वह पंजाब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और उनकी पहचान एक कारोबारी तथा क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय नेता के रूप में रही है।
2027 के चुनाव से पहले बदलेगा पंजाब का सियासी समीकरण ?
पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दल अपने संगठन और क्षेत्रीय पकड़ को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में रमेंद्र सिंह आवला का कांग्रेस छोड़कर अकाली दल में शामिल होना दोनों दलों के लिए अहम घटनाक्रम है।
अकाली दल को उम्मीद है कि आवला की क्षेत्र में सक्रियता से फिरोजपुर और फाजिल्का सहित सीमावर्ती इलाकों में पार्टी को मजबूती मिलेगी। वहीं, कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम एक राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आवला के अकाली दल में शामिल होने का आगामी चुनावों में कितना असर पड़ता है और पार्टी इस राजनीतिक बदलाव को जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी तरीके से भुना पाती है।
