चंडीगढ़, 07/10/2026
आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब ने श्री आनंदपुर साहिब स्थित एसजीपीसी-संचालित सराय में एक महिला के आठ महीने तक ठहरने के मामले में एसजीपीसी (SGPC) अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी द्वारा सीबीआई (CBI) जांच की मांग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ‘आप’ ने पूछा है कि आखिर एसजीपीसी इस पूरे मामले की जांच कर रही पंजाब पुलिस के साथ सहयोग करने से क्यों कतरा रही है। पंजाब ‘आप’ के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी, जो खुद को ‘सुखबीर सिंह बादल का सिपाही’ मानते हैं, इस पूरे मामले से जुड़े बुनियादी सवालों के जवाब देने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। पंजाब पुलिस को संबंधित रिकॉर्ड सौंपने के बजाय वे इस मामले को सीबीआई को ट्रांसफर करने की मांग कर रहे हैं।
‘आप’ ने उठाए ये मुख्य सवाल
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आठ महीने का स्टे और सुविधाएं: महिला को श्री आनंदपुर साहिब क्यों लाया गया, उसे वहां आठ महीने तक रुकवाने की व्यवस्था किसने की, और एसजीपीसी द्वारा उसे वाहन, सेवादार तथा अन्य खर्च क्यों मुहैया कराए गए?
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1 लाख रुपये का वित्तीय ट्रांसफर: एसजीपीसी के खाते से महिला के खाते में ट्रांसफर किए गए 1 लाख रुपये के बारे में धामी ने अब तक कोई स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया?
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सराय का रिकॉर्ड और अनुशंसक: जब इससे जुड़ा सारा रिकॉर्ड एसजीपीसी के पास ही है, तो सीबीआई जांच की क्या जरूरत है? सराय के रजिस्टर से साफ पता चलना चाहिए कि महिला के ठहरने की सिफारिश किसने की थी और ये सुविधाएं किसने मंजूर की थीं।
बलतेज पन्नू ने मांग की कि एसजीपीसी को महिला को दी गई गाड़ी, तैनात सेवादार, उसके प्रवास पर हुए खर्च और सभी वित्तीय लेनदेन का पूरा विवरण तुरंत पंजाब पुलिस को सौंपना चाहिए।
सीबीआई जांच की मांग पर जताया संदेह
2015 के बेअदबी मामलों की सीबीआई जांच का जिक्र करते हुए पन्नू ने कहा कि उस समय मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद अंततः क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी गई थी। उन्होंने अंदेशा जताया कि क्या इस मामले को भी किसी अन्य एजेंसी को सौंपकर ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है?
उन्होंने कहा, “श्री आनंदपुर साहिब जैसी पवित्र जगह पर जो कुछ हुआ, उसे लेकर सिख समुदाय में गहरा रोष और चिंताएं हैं। इसे महज एक और एजेंसी को सौंपकर दबाया नहीं जा सकता। इसमें पूरी पारदर्शिता की जरूरत है।”
अकाली दल पर भी साधा निशाना
बलतेज पन्नू ने अकाली दल (बादल) के नेता बंटी रोमाणा के बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रोमाणा का दावा था कि महिला ने सुखबीर सिंह बादल से संपर्क किया था और उन्हें पुलिस के पास जाकर एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी गई थी। ‘आप’ नेता ने पूछा, “अगर अकाली दल नेतृत्व चाहता था कि महिला पुलिस के पास जाए, तो अब सीबीआई को उपयुक्त एजेंसी के रूप में क्यों पेश किया जा रहा है?”
सोशल मीडिया हैरेसमेंट पर कार्रवाई की मांग
बलतेज पन्नू ने इस बात पर भी चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर महिला को निशाना बनाने और परेशान करने वालों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि सिख बुद्धिजीवी और युवा इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। अगर एसजीपीसी का मानना है कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई है, तो उसे पंजाब पुलिस को सराय रजिस्टर, बैंक विवरण और खर्चों से जुड़ी हर फाइल सौंपने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।
