अमृतसर, 07/10/2026
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने आनंदपुर साहिब स्थित गुरुद्वारा साहिब की सराय से जुड़े विवाद पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जांच उप-समिति (Sub-Committee) की प्रारंभिक रिपोर्ट सार्वजनिक की। उन्होंने कहा कि पूर्व एसजीपीसी सदस्य अमरजीत सिंह चावला पर एक महिला द्वारा लगाए गए बलात्कार के आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत और तथ्यहीन हैं। धामी ने स्पष्ट किया कि कुछ असामाजिक तत्वों और राजनीतिक विरोधियों द्वारा सिख पंथ की सर्वोच्च प्रशासनिक संस्था और गुरुद्वारा प्रबंधन की छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
जांच उप-समिति की रिपोर्ट और जांच के मुख्य बिंदु
एसजीपीसी अध्यक्ष ने बताया कि तख्त श्री केसगढ़ साहिब की सराय से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच के लिए चार सदस्यीय उप-समिति गठित की गई थी। इस समिति में सरदार कुलदीप सिंह तेग, सरदार दलजीत सिंह भिंडर, बीबी कुलविंदर कौर और सरदार गुरबख्श सिंह खालसा शामिल थे, जबकि सचिव कुलविंदर सिंह रामदास को संयोजक बनाया गया था।
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सराय रजिस्टर में छेड़छाड़: प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान धामी ने सराय का मूल रजिस्टर और दस्तावेज मीडिया के सामने प्रस्तुत किए। उन्होंने दिखाया कि कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित साजिश के तहत रजिस्टर की प्रविष्टियों (Entries) में हेरफेर किया गया था। एंट्री नंबर 246 के बाद 247 को काटकर 248 बनाया गया और बीच में अतिरिक्त पंक्तियां जोड़ी गईं, ताकि यह दिखाया जा सके कि संबंधित महिला (जसविंदर कौर) वहां लगातार छह महीने रुकी थी। इस रिकॉर्ड की लिखावट की जांच हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स से भी करवाई जा रही है।
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महिला के ठहरने और भुगतान का पूरा ब्योरा: रिकॉर्ड के अनुसार, संगरूर निवासी महिला दिसंबर के दौरान केवल 7 से 9 दिसंबर (कमरा नंबर 38), 9 से 11 दिसंबर, 28 से 29 दिसंबर और जनवरी में कुछ समय के लिए ही रुकी थी और उसने नियमानुसार निर्धारित किराया जमा किया था। इसके अलावा वह मार्च से जुलाई के बीच सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब की सरायों में भी कुल 8 बार सीमित समय के लिए ठहरी थी। धामी ने सवाल उठाया कि जब महिला के अन्य स्थानों पर ठहरने के प्रमाणित रिकॉर्ड मौजूद हैं, तो वह एक ही समय में लगातार छह महीने आनंदपुर साहिब में कैसे रह सकती थी?
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वीआईपी सुविधाओं के दावों का खंडन: धामी ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि महिला को एसजीपीसी द्वारा कोई विशेष गाड़ी, ड्राइवर या वीआईपी सुविधाएं दी गई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी ने व्यक्तिगत स्तर पर कोई लापरवाही या मिलीभगत की है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
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इलाज के लिए दी गई एक लाख रुपये की सहायता: अस्पताल और इलाज के लिए दी गई सहायता पर धामी ने बताया कि महिला ने स्वास्थ्य खराब होने और मानसिक तनाव के कारण मदद की गुहार लगाई थी। अंतरिम कमेटी की बैठक में नियमानुसार विचार करने के बाद चैरिटेबल फंड से यह राशि स्वीकृत की गई थी, जो पूरी कमेटी की सहमति से लिया गया पारदर्शी फैसला था।
सीबीआई जांच की मांग और ‘मीडिया ट्रायल’ पर चेतावनी
एसजीपीसी अध्यक्ष ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए सनसनीखेज खबरें चलाने और ‘मीडिया ट्रायल’ करने पर गहरा रोष जताया। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी किसी भी निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हटती। इस आपराधिक साजिश और सच्चाई को पूरी तरह सामने लाने के लिए सीबीआई (CBI) जांच ही सबसे उपयुक्त विकल्प है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। अंत में उन्होंने दोहराया कि एसजीपीसी सिख संगत के प्रति पूरी तरह जवाबदेह है और संस्था के नियमों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
