नई दिल्ली:(Patarkar Desk) भारतीय जनता पार्टी भले ही सबके सामने दावा कर रही हो कि वह पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने को तैयार है, लेकिन शिरोमणि अकाली दल के साथ चुनाव से पहले गठबंधन की अभी भी संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों के बीच सीट-शेयरिंग पर पहले दौर की बातचीत हो चुकी है और आने वाले दिनों में BJP की सीनियर लीडरशिप और अकाली दल के नेताओं के बीच एक और अहम मीटिंग होने की संभावना है। फिलहाल, बातचीत मुख्य रूप से तीन अनसुलझे मुद्दों पर फोकस है: सीट-शेयरिंग फॉर्मूला, विधानसभा सीटों की पहचान, लीडरशिप अरेंजमेंट।
सूत्रों के हवाले से सामने आए एक प्रस्ताव के मुताबिक, शिरोमणि अकाली दल को 70 सीटें और BJP को 47 सीटें दी जा सकती हैं। अकाली दल के नेताओं का मानना है कि पंजाब की राजनीतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पंथिक पार्टी को ‘बड़े भाई’ के तौर पर देखा जाना चाहिए। हालांकि, BJP का एक गुट लगभग बराबर बंटवारे पर जोर दे रहा है। उनका तर्क है कि पार्टी के बेहतर चुनावी प्रदर्शन और संगठन के विस्तार को देखते हुए, उसे पिछले गठबंधनों की तुलना में बड़ा हिस्सा मिलना चाहिए। गठबंधन में दूसरा बड़ा मुद्दा यह तय करना है कि कौन सी पार्टी किन सीटों से चुनाव लड़ेगी। पुराने गठबंधन के दौरान, BJP पारंपरिक रूप से शहरी इलाकों की 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी, जबकि अकाली दल मुख्य रूप से ग्रामीण पंजाब में चुनाव लड़ता था।
चुनाव के बाद लीडरशिप के फॉर्मूले पर भी गठबंधन में गंभीर चर्चा हो रही है। अगर गठबंधन होता है, तो मुख्यमंत्री का चेहरा अकाली दल द्वारा पेश किए जाने की उम्मीद है और इसके साथ ही डिप्टी मुख्यमंत्री पद को लेकर भी चर्चा हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर सुखबीर सिंह बादल को तरजीह देगा, जबकि BJP के कुछ वर्ग अभी भी इस बात पर आश्वस्त नहीं हैं कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा करना फायदेमंद होगा या नहीं।
दोनों पार्टियों के बीच इस नए सिरे से शुरू हुई बातचीत में चुनाव के आंकड़े अहम भूमिका निभाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में, BJP ने पंजाब में 18.56 प्रतिशत वोट हासिल किए थे और 23 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की थी। दूसरी ओर, शिरोमणि अकाली दल ने 13.42 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। अगर दोनों के आंकड़े जोड़ दिए जाएं तो यह मिला-जुला वोट बैंक करीब 32 पृतिशत हो जाता है। लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या वे अपने वोट पूरी तरह बदलाव कर पाएंगे और अगर वे अलायंस बनाते हैं तो उन्हें ज्यादा वोट भी मिल पाएंगे।
