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बेंगलुरु, 01 जुलाई 2026
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अंतरिम गुजारा भत्ते पर एक अहम फैसले में कहा है कि अगर कोई आर्थिक रूप से इंडिपेंडेंट पत्नी अपने पति से ज्यादा कमाती है, तो वह मेंटेनेंस पाने की हकदार नहीं है. कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें एक पति को अपनी पत्नी को अंतरिम मेंटेनेंस के तौर पर हर महीने 20,000 रुपये देने का आदेश दिया गया था.
जस्टिस चिल्लकुर सुमलता ने यह आदेश पति की उस याचिका को स्वीकार करते हुए दिया जिसमें महीने का गुजारा भत्ता देने के ट्रायल कोर्ट के निर्देश को चुनौती दी गई थी. हाई कोर्ट ने कहा कि कोर्ट को सिर्फ जेंडर के आधार पर यह मानकर मेंटेनेंस नहीं देना चाहिए कि पति हमेशा अपनी पत्नी को आर्थिक रूप सहयोग करने के लिए जिम्मेदार होता है. कोर्ट ने कहा कि मेंटेनेंस ऑर्डर हर मामले के फैक्ट्स और हालात की ध्यान से जांच करने के बाद ही पास किए जाने चाहिए, खासकर तब जब पत्नी फाइनेंशियली सिक्योर हो और उसे ऐसी मदद की जरूरत न हो.
कोर्ट ने आगे कहा कि जहां पत्नी आर्थिक रूप से स्वतंत्र है, अपने पति से ज़्यादा कमाती है और बच्चों की देखभाल जैसी कोई एक्स्ट्रा जिम्मेदारी नहीं है, तो कोर्ट को सिर्फ यह मानकर पति को मेंटेनेंस देने का आदेश नहीं देना चाहिए कि पत्नी का मेंटेनेंस करना उसकी ड्यूटी है.
बेंच ने फैमिली कोर्ट्स को इस पारंपरिक सोच से प्रभावित होने के खिलाफ चेतावनी दी कि पति को हमेशा अपनी पत्नी का गुजारा करना चाहिए. बेंच ने कहा कि अंतरिम या आखिरी गुजारा भत्ता आम तौर पर तभी दिया जाना चाहिए जब पत्नी यह दिखा दे कि उसके पास अपना गुजारा करने के लिए कोई अलग आर्थिक साधन नहीं है.
इस मामले के फैक्ट्स का जिक्र करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी ने खुद माना था कि उसकी महीने की इनकम 1 लाख रुपये थी, जो उसके पति की महीने की सैलरी से ज्यादा थी. कोर्ट ने कहा, ‘पत्नी पैसे के मामले में आजाद है और अपना गुजारा कर सकती है. इसलिए, ट्रायल कोर्ट के लिए पति को जिसकी महीने की सैलरी लगभग 60,000 रुपये है, हर महीने अंतरिम गुजारा भत्ता के तौर पर 20,000 रुपये देने का आदेश देना सही नहीं था. ऐसा आदेश कानूनी तौर पर टिकने लायक नहीं है.’
हालांकि, हाई कोर्ट ने साफ किया कि उसका फैसला सिर्फ अंतरिम मेंटेनेंस के मुद्दे तक ही सीमित है और यह शादी के झगड़े के आखिरी फैसले या मेंटेनेंस से जुड़े किसी भी आखिरी फैसले पर असर नहीं डालेगा.
इस जोड़े ने 2024 में शादी की थी, लेकिन शादी में अनबन की वजह से कुछ ही महीनों में अलग रहने लगे. इसके बाद पत्नी ने मेंटेनेंस के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कार्रवाई के दौरान यह सामने आया कि पति को हर महीने 60,646 रुपये सैलरी मिल रही थी, जबकि पत्नी हर महीने 1 लाख रुपये कमा रही थी. इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने पति को अंतरिम मेंटेनेंस के तौर पर हर महीने 20,000 रुपये देने का निर्देश दिया.
उस आदेश को चुनौती देते हुए पति ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसने अब ट्रायल कोर्ट के निर्देश को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि जब पत्नी पैसे के मामले में आत्मनिर्भर हो और अपने पति से काफी ज़्यादा कमाती हो, तो अंतरिम मेंटेनेंस नहीं दिया जा सकता.

