चंडीगढ़, 09/01/2025
आज 45वें दिन किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल जी का आमरण अनशन खनौरी किसान मोर्चे पर जारी रहा, आज सरकारी एवम प्राइवेट डॉक्टरों की टीम ने अल्ट्रासाउंड सहित अन्य तमाम टेस्ट किये जिनकी रिपोर्ट कल दोपहर तक आएगी जो देशवासियों के साथ साझा करी जाएगी। किसान नेताओं ने कहा कि कल 10 जनवरी को देशभर में गाँव स्तर पर मोदी सरकार के पुतले जलाए जाएंगे, और 12 जनवरी से हरियाणा के तमाम जिलों से किसानों के जत्थे खनौरी मोर्चे पर पहुंचना शुरू होंगे जिसके लिए गाँव-गाँव में तैयारी करी जा रही है। आज सरदार जगजीत सिंह डल्लेवाल जी द्वारा हस्ताक्षरित चिट्ठी दोनों मोर्चों की तरफ से सभी राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्षों को भेजी जा रही है ताकि सभी राजनीतिक पार्टियां MSP गारंटी कानून के मुद्दे पर अपना स्टैंड स्पष्ट करें।
राजनीतिक पार्टियों को लिखी चिट्ठी नीचे दी गयी है
माननीय
MSP गारंटी कानून के लिए मैं जगजीत सिंह डल्लेवाल पिछले 45 दिनों से आमरण अनशन पर हूँ और मेरी नाजुक तबियत के बारे में आपको सूचना मिल ही रही होगी। हम 13 फरवरी 2024 से सड़कों पर बैठे हैं, हमारी कोई नई मांगें नहीं है बल्कि अलग-अलग समयों पर सरकारों द्वारा किये गए वायदों को पूरा कराने के लिए हम आंदोलन कर रहे हैं। 13 फरवरी से शुरू हुए हमारे आंदोलन में पुलिस की हिंसात्मक कारवाई में 1 किसान शुभकरण सिंह की गोली लगने से शहादत हुई, 5 किसानों की आंखों की रोशनी चली गयी एवम 434 किसान घायल हो गए।
पहले सिर्फ किसान एवम खेतिहर मजदूर ही MSP गारंटी कानून की मांग कर रहे थे लेकिन अब तो खेती के विषय पर बनी संसद की स्थायी समिति ने भी अपनी रिपोर्ट (पहला वॉल्यूम, पॉइंट 7, पेज 54) पर स्पष्ट कर दिया है कि MSP गारंटी कानून बनाया जाना चहिए और इस से किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवम देश को बहुत फायदा होगा। MSP गारंटी कानून से किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी जिस से देश की अर्थव्यवस्था को बहुत फायदा होगा। यह संसद की सर्वदलीय कमेटी है जिसमें सभी राजनीतिक पार्टियों की तरफ से 31 सांसद शामिल हैं। 2011 में जब माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उपभोक्ता मामलों की कमेटी के चेयरमैन थे तो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय डॉ मनमोहन सिंह को रिपोर्ट भेजकर कहा था कि किसी भी व्यापारी द्वारा किसी भी किसान की फसल सरकार द्वारा निर्धारित MSP से नीचे नहीं खरीदी जानी चाहिए और इसके लिए कानून बनाना चाहिए लेकिन 2014 में सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी ने अब तक खुद की सिफारिश लागू नहीं करी है। किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए बनाए गए डॉ स्वामीनाथन आयोग ने 2006 में अपनी रिपोर्ट दी, 2014 तक यूपीए की सरकार सत्ता में रही लेकिन उन्होंने रिपोर्ट लागू नहीं करी, 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान माननीय नरेंद्र मोदी ने वायदा किया था कि वे प्रधानमंत्री बने तो स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के अनुसार फसलों का MSP तय करेंगे। 2014 में सत्ता में आने के बाद 2015 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हलफनामा देकर कहा कि वे स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं कर सकते हैं। 2018 में पंजाब की चीमा मंडी में 35 दिन धरना देने के बाद में माननीय अन्ना हजारे जी एवम माननीय जगजीत सिंह डल्लेवाल जी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आमरण अनशन किया था, उस समय तत्कालीन कृषि मंत्री माननीय राधा मोहन सिंह एवम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री माननीय देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से माननीय डॉ जितेंद्र सिंह द्वारा हस्ताक्षरित चिट्ठी आंदोलनकारी नेताओं को सौंपी थी जिसमें साफ तौर पर लिखा था कि केंद्र सरकार 3 महीने में स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले को लागू करेगी लेकिन 6 साल बीत जाने के बावजूद आज तक उसे लागू नहीं किया गया। 2020-2021 में 378 दिनों तक चले आंदोलन को स्थगित करते समय 9 दिसंबर 2021 को एक चिट्ठी कृषि मंत्रालय द्वारा हमें सौंपी गई थी जिसमें हर किसान के लिए MSP सुनिश्चित करने, खेती कार्यों को प्रदूषण कानून से बाहर निकालने, लखीमपुर खीरी के घायलों को उचित मुआवजा देने, बिजली बिल को संसद में पेश करने से पहले किसानों से चर्चा करने एवम आंदोलनकारी किसानों पर आंदोलन सम्बन्धी मुकदमे वापिस लेने समेत कई लिखित वायदे किये गए थे जो आज तक अधूरे हैं।
हमारे देश में किसानों के लिए पिछले 77 सालों में सब से दुर्भाग्यपूर्ण बात यह रही है कि जब कोई राजनीतिक पार्टी विपक्ष में होती है तो किसानों के हित में बात करती है लेकिन जब सत्ता में आती है तो किसानों से किये वायदों को भूल जाती है। मैं MSP गारंटी कानून बनवाने के लिए आमरण अनशन करते हुए अपनी ज़िंदगी कुर्बान करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार हूं लेकिन एक बात हमें ध्यान रखनी चाहिए कि यदि किसानों से किये वायदों को पूरा कराने के लिए मेरे जैसे एक साधारण किसान की शहादत होती है तो हमारे देश के राजनीतिक वर्ग के ऊपर ऐसा धब्बा लगेगा जिसे वे कभी साफ नहीं कर पाएंगे। मेरी शहादत के बाद जब इतिहासकार इतिहास लिखेंगे तो वे ये सवाल भी पूछेंगे कि क्या उस समय राजनीतिक पार्टियों (सत्ता और विपक्ष) ने अपनी ज़िम्मेदारी सही ढंग से निभाई जब देश के किसान MSP गारंटी कानून बनवाने के लिए ठिठुरती ठंड में सड़कों पर बैठे थे?
21वीं सदी में एक तरफ हम 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था एवम 2047 तक विकसित भारत बनाने की बात करते हैं लेकिन दूसरी तरफ हमारे देश के किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं। आज समय की नजाकत को समझते हुए MSP गारंटी कानून के मुद्दे पर सभी राजनीतिक पार्टियों को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होना चाहिए ताकि किसानों की आत्महत्या रोकी जा सके।